रेंजर विद्या निनारे को थमाया नोटिस

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गणेश पांडे, भोपाल। लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी की प्रभारी एसडीओ एवं रेंजर सुनीता अहीरवार को शीर्षस्थ अधिकारियों के वरदहस्त होने के कारण मनमानी पर उतारू हो गई है। अहिरवार ने अपने ही बैच की रेंजर विद्या निनारे को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। उन्होंने यह नोटिस विद्या निनारे को इसलिए दिए, क्योंकि वह प्रबंध संचालक और सीईओ द्वारा मीटिंग में सबके सामने दिए गए निर्देश पर रॉ मटेरियल जांच करने के भंडारगृह पहुंच गई थी। यहीं नहीं, प्रबंधक उत्पादन अहिरवार एमएसपी पार्क के व्याप्त कथित गड़बड़ियों की जांच से संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी एसीएफ मणि शंकर मिश्रा को उपलब्ध नहीं कर रही हैं। सीईओ ने लिखित आदेश में एसीएफ मिश्रा को जांच करने के लिए 7 दिन की मोहलत दी थी किंतु 10 दिन से अधिक समय बीत गया है पर जांच शुरू नहीं हो पाई। रेंजर को दिए गए नोटिस में सुनीता अहिरवार ने लिखा है कि 1 अप्रैल को गोडाउन क्र. 2 से 21 हर्बल कच्ची सामग्री के सैंपल लिए गए जिस संबंध में पूर्व में मुझे सूचना नहीं दी गई और ना ही इस संबंध में मुझे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोई लिखित आदेश दिया गया। आपका यह कृत्य किसी प्रकार से संस्था हित में नहीं है। जबकि जिस मीटिंग में लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक और सीईओ ने रेंजर विद्या निनारे को निर्देश दिए थे उसे समय सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी। चर्चा है कि भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जान-पहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है। एसीएफ एवं जांच अधिकारी मणि शंकर मिश्रा ने गड़बड़ियां संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अब तक चार स्मरण पत्र लिखे हैं पर उत्पादन प्रबंधन अहिरवार ने अब तक कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसके कारण गड़बड़ियों की जांच नहीं शुरू हो पा रही है। सुनीता अहीरवार ने मुख्यकार्यपालन अधिकारी कार्यालय को दरकिनार कर ख़ुद का अलग विभाग ही स्थापित कर दिया है और कार्यालयीन पत्रों के डिस्पैच रजिस्टर भी ख़ुद बना लिये है। ख़ुद ही नोटिस जारी करने लगी है। जबकि इस बाबत कोई अनुमोदन आदेश सीईओ या संघ से नहीं हुये है कि केंद्र का उत्पादन डिस्पैच रजिस्टर पृथक से हो। उत्पादन शाखा बिना सीईओ को जानकारी दिए कार्य करेगा। सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की गवर्मेंन्ट सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रा-मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किए गए है जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे और तो और 35-50 लाख के मरम्मत के भुगतान किए जा चुके है। संघ में हुई शिकायतों की जांच के लिये मनोज अग्रवाल ने पत्र भी लिखा लेकिन जांच अधिकारी मणिशंकर मिश्रा के 2 नोटिस देने के बाद भी सारी फ़ाइलें, बिल, रिकॉर्ड ख़ुद दबा कर बैठ गई है और जांच में सहयोग भी नहीं कर रही। सुनीता अहीरवार ने एसीएस वन से मुलाक़ात कर सीईओ फुलझले की शिकायत की और तो और मीटिंग में भी सीईओ और सुनीता अहिरवार की कहासुनी की चर्चा आम है। एक बार तो परेशान होकर सीईओ प्रफुल्ल फुलझले ने ग़ुस्से में पानी का ग्लास ही इनके सामने फोड़ दिया था।

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