रबी सीजन की प्रमुख फसलों का रकबा ऊपर-नीचे होने का असर अब समर्थन मूल्य की खरीदी पर दिखाई पड़ रहा है। जिसको लेकर प्रारंभ से ही इन कयासों को बल मिल रहा था। बहरहाल, किसान गेहूॅ बेचने के लिये मंड़ी का रूख कर रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, जो किसानों को समर्थन मूल्य से दूरी बनाए रखने को विवश कर रहे हैं। जिसमें सबसे पहला कम उत्पादन दूसरा गुणवत्ता पर असर तथा तीसरे पायदान पर भाव को लेकर असमंजस्य तथा मूंग बुआई के लिये नगदी की उपलब्धता को लेकर किसानों ने नजरों को सीधी दिशा में तान रखा है।
अनोखा तीर, हरदा। इस साल रबी सीजन में सर्वाधिक रकबा चना का होने के साथ ही फसलों पर मौसम की मार, भाव में अंतर तथा सरकारी खरीदी में मापदंडो की अनिवार्यता समेत कई ऐसी वजह हैं जो इस बार सरकारी खरीदी का लक्ष्य पूरा करने में बाधक बनकर खड़ी हैं। यही वजह है कि इस साल जहां मंड़ियों में फसलों की बंपर आवक है, वहीं सरकारी खरीदी के लिये बनाए गए केन्द्रों पर अपेक्षाकृत ट्रालियां नही पहुंच रही हैं। जिसके चलते केन्द्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसा ही कुछ हाल चना खरीदी केन्द्रों का बताया जा रहा है। जहां खरीदी की रफ्तार कछुआ चाल चल रही है। इन सबके बीच उन तमाम कयासों को बल मिला है, जो इस साल प्रारंभ से ही लगाए जा रहे थे। क्योंकि, इस बार चने का रकबा उम्मीद से कई ज्यादा रहा, वहीं गेहूॅ का रकबा पहले की तुलना आधे से कम हो गया। दूसरी तरफ मौसम की बेरूखी फसलों की सेहत पर भारी पड़ी। बेमौसम बारिश और बूंदाबांदी के अलावा धुंधार ने सारा खेल बिगाड़कर रख दिया। गनीमत रही कि उत्पादन पर असर पड़ने के बावजूद किसानों के हाथ खाली नही रहे। किसानों के मुताबिक गेहूॅ का उत्पादन २० से ३० प्रतिशत कम हुआ है। साथ ही गेहूॅ की गुणवत्ता को भी झटका लगा है। जिसके चलते समर्थन मूल्य पर गेहूॅ बेचने का विचार ठंडे बस्ते में चला गया। किसानों का कहना है कि मंडी में गेहूॅ २२-२३०० रूपये तक नगद में बिक रहा है। इसीलिये खुली नीलामी को तवज्जों दी है। क्योंकि, ग्रीष्मकालीन मूंग के लिये खेत तैयार करने के साथ साथ बुआई, दवाई , निंदाई-गुढ़ाई समेत अन्य कार्यो से लेकर में पल-पल पर नगदी की जरूरत पड़ती है।
आवक २५ हजार के पार
इधर, कृषि उपज मंडी में बुधवार को २५ हजार बोरे से ज्यादा की आवक रही। जिसमें गेहूॅ की आवक 1६ हजार तथा चना 4 हजार बोरे से ऊपर रिकार्ड हुआ है। ये आंकडा केवल मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी का है। जिले की खिरकिया और टिमरनी मंडी में भी बंपर आवक की खबर है। गेहूॅ और चना की ट्रालियों से मंडी प्रांगढ़ खचाखच देखने को मिला। प्राप्त जानकारी के अनुसार हरदा में आवक ज्यादा होने की वजह से कई ट्रालियों का भाव नही हो सका है। जानकारी के मुताबिक गुरूवार को उन्हीं ट्रालियों से खरीदी की शुरूआत होगी।
प्रायवेट कंपनियां भी सक्रिय
यह भी देखने को मिल रहा है कि मंड़ियों में स्थानीय व्यापारियों के अलावा बाहर की कंपनियां खरीदी में रूचि ले रही है। जिसका किसानों को नगद भुगतान मिल रहा है। जिसके चलते निजी केन्द्रों पर फसलों से भरी ट्रालियों की कतार लगी है। किसान गेहूॅ बेचने के लिये वहां पहुंच रहे हैं। एक किसान से दूसरे किसान तक पहुंच रही खबर के बाद किसानों की भीउ़ बढ़ रही है। मिली जानकारी के अनुसार आईटीसी कंपनी खंडवा रोड पर जहां ढा़बे के पास खरीदी कर रही है। वहीं एक अन्य कंपनी के प्रतिनिधि गेहूॅ की खरीदी कर रहे हैं।
जमीनी हकीकत ….
– गेहूॅ का रकबा कम हुआ
– उत्पादन-गुणवत्ता प्रभावित
– भाव को लेकर असमंजस्य
– समर्थन मूल्य पर मापदंड का पेंच
– मंडी में बगैर ग्रीडिंग गेहूॅ विक्रय
– भुगतान में 15 दिनों का अंतर
– मूंग के लिये धन की व्यवस्था
हरदा
फसल — आवक — मॉडल भाव
गेहूॅ — १६४५९ — २३५०
चना — २१५३ — ५३१०
सोयाबीन — १९२३ — ४३११
मूंग — ४३० — ८०५०
टिमरनी
फसल — आवक — मॉडल भाव
गेहूॅ — ७४९९ — २३५०
चना — १६११ — ५३५०
सोयाबीन — १८० — ४३२०
मूंग — १३१ — ७६५०
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