फॉरेस्ट रेस्ट हाउस वन अधिकारियों को ही आवंटित करने के निर्देश

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गणेश पांडे, भोपाल। राज्य शासन ने निर्देश जारी किया है कि फॉरेस्ट रेस्ट हाउस वन अधिकारियों को ही आवंटित किया जाए। अपने आदेश में राज्य शासन ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश का हवाला भी दिया है। राज्य शासन को यह निर्देश तब जारी करना पड़े, जब वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने वन बल प्रमुख को एक नोटशीट भेजा था कि रेस्ट हाउस में अनाधिकृत रूप से फॉरेस्ट अधिकारी रुकते हैं। वर्तमान में भोपाल के रेस्ट हाउस में 6 कमरे वन मंत्री और उनके कार्यकर्ताओं के कब्जे में हैं। राज्य शासन को यह निर्देश इसलिए जारी करना पड़े, क्योंकि वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने अपने अघोषित ओएसडी एवं वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान की सलाह पर विभाग प्रमुख को एक नोट शीट लिखकर कहा था कि रेस्ट हाउस में अनाधिकृत रूप से फॉरेस्ट अधिकारी रुक रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि रेस्ट हाउस में कमरे का आवंटन रणजीत सिंह चौहान अपने मनमाफिक चाह रहे थे। इसी चाहत में उन्होंने वन मंत्री नागर सिंह चौहान को वस्तुस्थिति से अवगत न करते हुए एक नोटशीट विभाग के मुखिया असीम श्रीवास्तव के लिए लिखवा दी। वन मंत्री चौहान की नोटशीट का जवाब एपीसीसीएफ शशि मलिक ने इस अंदाज में दिया जिस अंदाज में वन मंत्री ने पत्र लिखा था। एपीसीएफ मलिक ने आईना दिखाते हुए उच्चतम न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट कर दिया कि फॉरेस्ट रेस्ट हाउस केवल अफसर के लिए ही आवंटित किया जा सकता है। वन मंत्री नागर सिंह चौहान और विभागीय अफसर के बीच बनी असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए राज्य शासन को आदेश जारी करना पड़े। अघोषित ओएसडी की गलत सलाह के चलते वन मंत्री चौहान की प्रशासनिक किरकिरी हो गई।

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