अफसरों की लापरवाही: पत्थर पी गए 300 एमसीएफटी पानी, ग्‍वालियर में पानी की किल्लत

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अनोखा तीर भोपाल:-अल्पवर्षा के कारण शहर में धीरे-धीरे पानी की कमी हो रही है। एक तरफ जहां दैनिक उपयोग के लिए तिघरा बांध से एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है, तो वहीं खेती-किसानी के लिए भी लोग परेशान हो रहे हैं। इस बीच जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण फसलों की सिंचाई के लिए नहर में छोड़ा गया 300 एमसीएफटी पानी बर्बाद हो गया, क्योंकि नहर में बड़े-बड़े पत्थर टूटकर गिरे हुए थे, जो पानी को खेतों तक नहीं पहुंचने दे रहे थे। फसलों की सिंचाई के लिए संघर्ष कर रहे किसानों ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो खुद ही एकजुट होकर पत्थरों का सीना चीरा और अपने खेतों तक पानी पहुंचाने की राह बना ली। हालांकि किसानों को पानी अभी भी नहीं मिला है, लेकिन उनके प्रयासों के आगे नतमस्तक अधिकारी अब पानी छोड़ने का वादा कर रहे हैं।

सिंचाई के लिए 300 एमसीएफटी पानी की जरूरत-

ककेटो डेम से सात गांव के करीब 5 हजार किसानों की फसलों की सिचाई की जाती है। गेहूं की फसल के लिए तीन पानी की आवश्यकता होती है। पहला पानी फसल में जनवरी में दूसरा फरवरी में और तीसरा मार्च में दिया जाता है। हर बार 100-100 एमसीएफटी पानी डेम से सिचाई के लिए खर्च होता है। लेकिन इस बार अफसरों की लापरवाही से तीन बार का पानी एक ही बार में खर्च कर दिया गया और अब अफसर सिचाई के लिए पानी देने से इंकार कर रहे हैं। जिसको लेकर किसान परेशान है। उन्होंने जल संसाधन विभाग से लेकर कलेक्टर तक से गुहार लगाई जब सुनवाई नहीं हुई तो विधायक की घेराबंदी तक की।

इस तरह से हुआ बर्बाद-

असल में ककेटो डेम से पहसारी बांध के बीच एक नहर बनी हुई है। चार साल पहले इस नहर के लीकेज रोकने के नाम पर 7 करोड़ रुपये खर्च किया जा चुका है। ककेटो डेम से पहसारी के बीच में जगह जगह नहर टूटी पड़ी है। जब एक जनवरी को डेम से पानी छोड़ा गया तो नहर के बीच में पत्थरों ने रास्ता रोक रखा जिससे पानी आगे नहीं जा सका तब तीन गेट खोलने पड़े और 400 एमसीएफटी पानी छोड़ना पड़ा, लेकिन किसानों के हिस्से में 100 एमसीएफटी ही पानी पहुंचा और 300 एमसीएफटी पानी बर्बाद हो गया।

वर्षा का पानी इस तरह से पहुंचता तिघरा-

मोहना के आसपास के क्षेत्र में वर्षा का पानी अपर ककेटो में जमा होता है। जब अपर ककेटो भर जाता है तो पानी ककेटो डेम में छोड़ दिया जाता है जब ककेटो भर जाता है तो पेहसारी के लिए पानी छोड़ दिया जाता है और जब पेहसारी डेम भर जाता है तब पानी तिघरा में पहुंचाया जाता है।

कहां पर कितना पानी-

अपर ककेटो-600 एमसीएफटी

ककेटो डेम -1688एमसीएफटी

नोट:-ककेटो डेम से सिचाई के लिए 211 एमसीएफटी पानी छोड़ा जा सकता है। बाकी का 1477 एमसीएफटी पानी को डेम में रह जाता है।नहर के बीच में पत्थरों ने पानी का रास्ता रोक दिया था। जिस पर अफसरों ने ध्यान नहीं दिया और 300 एमसीएफटी पानी बर्बाद कर दिया। जब पत्थर हटवाने के लिए गुहार लगाई तो किसी ने सुनवाई नहीं की। मजबूरी में किसानों ने खुद ही एक जुट होकर पूरी नहर की सफाई की और पानी के रास्ते में रोड़ा बने पत्थर हटा दिए।

राजेन्द्र प्रसाद नायक, पूर्व अध्यक्ष सिचाई विभाग एवं किसान

डेम से सिचाई के लिए 7 गांव के किसानों काे पानी मिलता है। नहर में लीकेज के कारण हर बार पानी बर्बाद होता है पर अफसर इसका संधारण नहीं करा रहे। जिससे पानी भी बर्बाद हो जाता है और किसानों को लाभ भी नहीं मिल पाता।

सुमन विजेन्द्र सिंह ,सरपंच सहसारी

अफसरों की सफाई

13 किमी की नहर का संधारण के लिए 65 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मंजूरी मिले तो काम हो सके।नहर टूटने से पानी बर्बाद हुआ है। किसानों की फसल खराब ना हो इसलिए पानी डेम से छोड़ा जाएगा और नहर की सफाई के लिए दल भी लगा दिया है।

आरके चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभा

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