भोपाल- बीते दो वर्षों में नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 15 व्यवसायिक प्रोजेक्ट मंजूर किए गए। इनका निर्माण भी किया गया। लेकिन नियमों को दरकिनार कर बनाए गए ये कामर्शियल काम्पलेक्स अधिकारियों के साथ आवंटी दुकानदारों के लिए भी मुसीबत बन गए हैं। इनमें रेरा की आपत्ति आने के बाद दुकानों की राशि चुकाने पर भी दुकानदारों को आवंटन नहीं हो पा रहा है।
दुकानदार हो रहे परेशान
बता दें कि निगम अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा दुकानदारों को चुकाना पड़ रहा है। हालत यह है कि रेरा से मंजूरी न मिलने की वजह से बची हुई दुकानों को बेचने का टेंडर भी जारी नहीं हो पा रहे हैं। उधर जिन दुकानदारों ने राशि जमा कर दी है, उनकी रजिस्ट्री से लेकर अन्य मामले उलझते जा रहे है। माना जा रहा है कि निगम के द्वारा इन काम्प्लेक्स निर्माण के दौरान रेरा से मंजूरी नहीं ली गई, जबकि नियमानुसार यह जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा था। इसी के चलते नीलबड़ में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में एक लाख की पेनाल्टी भी लगाई गई है।
भवन अनुज्ञा और राजस्व शाखा की लापरवाही उजागर
यांत्रिक विभाग, भवन अनुज्ञा शाखा और राजस्व शाखा की लापरवाही के चलते यह हालात बने हैं। इसके अलावा निगम द्वारा इन प्रोजेक्ट निर्माण के दौरान जमीन के मालिकाना अधिकार को लेकर भी काम नहीं किया गया। जिसके बाद स्थिति और खराब हो गई है। दरअसल कई प्रोजेक्ट की जमीन पर मिल्कियत नजूल विभाग की है, ऐसे में इसका हस्तांतरण निगम के नाम होना था। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना था। लेकिन आनन-फानन में राजस्व जुटाने की जल्दबाजी के चलते इन प्रोजेक्ट पर रजिस्ट्री सहित अन्य काम अटके हुए है।
15 व्यवसायिक काम्प्लेक्स में एक हजार दुकानें
इधर रेरा के पंजीयन के लिए एक अगल सेल बनाकर इसमें जोनल अधिकारियों को काम सौंपा गया है। लेकिन इनकी कार्यशैली भी लेट लतीफी वाली है। जिसके चलते भी इन प्रोजेक्ट को पूरा होने के बाद भी अभी तक काम्प्लेक्स मेें दुकानदारों को कब्जे नहीं मिल पा रहे है। बतया जा रहा है कि इन 15 प्रोजेक्ट में निगम द्वारा काम्प्लेक्स बनाकर एक हजार से अधिक नई दुकानें बनाई गई हैं। जिनकी नीलामी से निगम को अच्छी खासी आय हुई है, लेकिन जो दुकानें इन गलतियों के चलते बिक नहीं पाई है। उनके टेंडर अभी रेरा और नजूल सहित अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में उलझी हुई है।
इस संबंध में जो दिक्कतें आ रही है, उन्हें दूर किया जा रहा है। आयुक्त ने इसका रिव्यू भी किया है। साथ ही रेरा में पंजीयन सहित अन्य प्रक्रियाओं को किया जा रहा है, ताकि जो कमर्शियल काम्प्लेक्स की दुकानों के संबंध में जो व्यवहारिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्हें दूर किया जा सके।
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