भोपाल- शहर के युवा नागरिक अपने योगदान से प्रदूषण को नियंत्रित करने में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। पेड़ों की सजीव रक्षा एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू है। पेड़ों को बचाने से न केवल वन्यजन बनता है, बल्कि ये वायुमंडल में आक्सीजन पैदा करने में मदद करते हैं और वातावरण में प्रदूषण को कम करने में सहायक होते हैं।
नव-अंकुरित पौधों को बचाने का उठाया बीड़ा
न्यू बोर्न पौधों को बचाने का डा. श्रीकांत गंगवार व उनकी टीम ने बीड़ा उठाया है, जिसमें वीरेंद्र ठाकुर और विजय मालवीय उनका सहयोग करते हैं। श्रीकांत के अनुसार न्यू बोर्न पौधों को बचाना है बहुत जरूरी है। जब हम फल खाकर गुठलियां कचरे में फेंक देते हैं तो वहां पौधा उग जाता है। कुछ समय बाद वही पौधे पेड़ बनकर हमें फल दे सकते हैं, आक्सीजन देने व प्रदूषण कम करने के साथ ही पर्यावरण को बचाने मे योगदान दे सकते हैं। लेकिन कचरे में पड़े बीज से पौधा बन जाता है, जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता और वो नष्ट हो जाता है। ऐसे पेड़ जो कचरे में उगे हैं, उन्हें उनकी टीम रेस्क्यू करती है। एक पोलीथिन में मिट्टी और खाद डालकर कुछ समय रखते हैं, फिर उचित स्थान देखकर उन्हें जमीन में लगा देते है। अभी तक 70 से ज्यादा न्यू बोर्न पौधों को गंगवार और उनके साथियों ने रेस्क्यू किया है।
हमें पेड़ों को बचाने की जरूरत
एक्सेलेंचर एजुकेशनल हेल्थ एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डा. श्रीकान्त गंगवार पेड़ों के डाक्टर के नाम से प्रचलित हो गए हैं। वह बताते हैं कि पौधे तो कई लोग रोपते हैं लेकिन इस प्रदूषित भरे वातावरण में जहां हवा प्रदूषित हो रही है और एक्यूआइ 300 से भी अधिक रहता है वहां हमें पेड़ों को बचाने की जरूरत है, जो हमारे लिए आक्सीजन तो देते ही है, साथ भी प्रदूषित हवा को भी स्वच्छ करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पेड़ को वापस खड़ा कर नया जीवन दिया
डा. श्रीकान्त गंगवार और साथी डा. अनुराग गुप्ता, अनिल बिल्लोरे ने भोपाल और इसके आसपास कई जगहों पर जाकर पेड़ों को बचाने का काम किया है। हाल ही में इन्होंने 40 फीट ऊंचे धराशायी पेड़ को नया जीवन दिया है। वहीं दानिश कुंज के पास 25 फीट ऊंचे नीम के पेड़ को बचाया। गंगवार के अनुसार हर व्यक्ति हर दिन लगभग दो से तीन पोलोथिन व प्लास्टिक उपयोग करता है, जो एक महीने में 60 से 90 तक हो जाती है। वर्षभर में 370 से 1095 होती है।
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