जगत और जगदीश को समझने के लिए सत्संग जरूरी : पंडित जोशी

अनोखा तीर, हरदा। नगर की शर्मा कॉलोनी में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन कथावाचक पंडित सुशील जोशी ने बताया कि जगत और जगदीश को समझने के लिए सत्संग ही एक साधन है। जब तक मनुष्य संसार को नहीं समझता तब तक वह ईश्वर से नहीं जुड़ता। संसार उसको ऐसा लगेगा कि संसार से ज्यादा और कहीं सुख है ही नहीं, इस भ्रम में पूरा जीवन निकाल देता है। लेकिन कभी वह किसी संत के सानिध्य में आकर के सत्संग के माध्यम से इस सत्य को समझता है कि इससे भी बड़ा सुख और कहीं है तो वह है भगवान के भजन में सत्संग में। महाभारत के प्रसंग में बताया दुर्योधन को भगवान श्री कृष्ण ने समझाया कि धर्मराज का विरोध मत करो। नहीं माना जीवन में कभी धर्म का विरोध मत करना, ना धर्म के कार्यों का और न ही कभी हमारा धर्म छोड़ना। आज कल लोग धर्म को मजाक समझते हैं। जहां सनातन के लिए लोगों ने अपने प्राण दे दिए वही सनातन को आज लोग मजाक समझते हैं। धर्म है तो हम हैं आज इतने मत और पंथ हो गए हैं, वह सब सनातन को कमजोर कर रहे हैं। सनातन धर्म को समझने के लिए सनातन का अध्ययन बहुत जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि आज की पीढ़ी को सनातन को समझना बहुत जरूरी है।

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