त्यौहारों से पहले गांव, शहर व बाजार में रौनक… सोयाबीन के बेहतर उत्पादन से किसान गदगद

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इधर, त्यौहार से पहले सोयाबीन आने पर बाजार में बढ़ी रौनक

 

इस साल सोयाबीन के बेहतर उत्पादन से क्षेत्र के किसान गदगद दिख रहे हैं। वहीं दीपावली से पहले फसलों की सकुशल कटाई हो जाने से गांव, शहर, कस्बा और बाजारों में रौनक दिखने लगी है। उधर, जिले की तीनों मंडी हरदा, खिरकिया और टिमरनी में हर रोज 20 हजार क्विंटल सोयाबीन की आवक निरंतर जारी है। इस हिसाब से फसलों के क्रय-विक्रय प्रक्रिया में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ रूपये का व्यापार होने की बात सामने आई है।

 

अनोखा तीर, हरदा। इस साल क्षेत्र में अधिकमास का खासा प्रभाव रहा। खेतों में लहलहाती फसलों के बीच धार्मिक आयोजनों की धूम रही। वहीं अंत में क्षेत्र का फसल कटाई काय्र भी प्राय: सकुशल पूरा हुआ है। इस दौरान फसलों के बेहतर उत्पादन से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं आगामी रबी फसलों की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। इन सबके बीच प्रमुख त्यौहारों में शीर्ष पर दीप उत्सव पर्व से पहले फसलों का कामकाग पूरा होने से गांव, शहर, कस्बा और बाजार में खासी रौनक दिखाई देने लगी है। वहीं मंडियों में सोयाबीन के अच्छे-खासे दाम ने किसानों के सारे कार्यो का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों जिले की तीनों मंडी हरदा, खिरकिया और टिमरनी में हर रोज करीब 20 हजार बोरे सोयाबीन की आवक जारी है। इनमें हरदा टॉपर है, जहां 10 हजार बोरे से ज्यादा आवक है। जबकि टिमरनी-खिरकिया में 3 से 4 हजार बोरे की आवक है। इस हिसाब से जिले में फसलों के क्रय विक्रय से हर रोज करीब 8 करोड़ रूपये का व्यापार हो रहा है।

5 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन

किसानों की मानें तो इस साल सोयाबीन का उम्मीद अनुरूप उत्पादन मिला। कई क्षेत्रों में जहां 5 से लेकर 8 क्विंटल प्रति एकड़ सोयाबीन झड़ी है। वहीं कई खेतों में उत्पादन इससे भी ऊपर टच हो गया। हालांकि ऐसे किसान भी हैं, जो उत्पादन के मामले में काफी पिछड़ गयेे हैं।

जलभराव वाले खेत बुरे प्रभावित

पहले लगातार बारिश फिर बाद में पानी की लंबी खेंच के चलते जिले के कुछ हिस्सों में फसलें प्रभावित होने की खबर है। इसके अलावा जलभराव वाले कृषि रकबे व पथरीले खेतों के साथ ही बेतहाशा खरपतवार से घिरी हुई सोयाबीन का इस साल उत्पादन घटा है।

चना पर फिर दांव लगाने की तैयारी

लंबे अंतराल के बाद इस साल खरीफ सीजन याने बारिश की फसल किसानों के लिये फायदेमंद साबित होने के बाद आगामी रबी सीजन में क्षेत्र के किसान एक बार फिर चना पर दांव लगाने की तैयारी में हैं। इसके लिये तमाम तैयारियों ने जहां जोर पकड़ लिया है। वहीं कई खेतों में पलेवा कार्य छेड़ दिया गया है। इस बारे में जब किसानों से चर्चा की तो वे चना की बेहतर से बेहतर किस्मों की तलाश में दिखे। जबकि कई किसान इन सब व्यवस्थाओं से पहले ही लेस हो चुके हैं। किसानों के मुताबिक रबी सीजन वर्ष २०२४ में लाल चना के अलावा खेतों में डॉटर और काटू चना पर भी दांव लगाया जाएगा। जानकारी के अनुसार अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक बड़े रकबे में चने की बोवनी संपन्न होने के आसार हैं। चना बुआई को लेकर किसानों की लगन व उत्साह इस पर मुहर लगाता है। उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी के जरिये चना वाजिफ दाम यानि ५ हजार के ऊपर खरीदा जाता है। जबकि डॉलर और काटू सरकारी खरीदी में शमिल नही है। हालांकि मंडियों में चना की वे दोनों किस्म ५ हजार से काफी ऊपर बिकते हैं। इसलिये क्षेत्र के किसानों का चना के प्रति साल दर साल रूझान बढ़ रहा है। इसकी मुख्य वजह सिंचाईं कार्य में संतुलन तथा गेहूॅ की तुलना में अधिक कमाई है।

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