मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद लागू की गई आचार संहिता की वजह से गरबा उत्सव के आयोजन की समय सीमा प्रशासन द्वारा तय कर दी गई। तय समय सीमा रात्रि 10 बजे तक की है। इस वजह से आयोजक और गरबा करने वाले युवक युवतियां काफी ज्यादा निराश है। क्योंकि हर साल नवरात्रि के दौरान गरबे की धूम सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन इस साल आचार संहिता की वजह से समय सीमा तय कर दी गई है जिसके चलते लोगों का उत्साह कम हो सकता है।
नवरात्रि के 9 दिन का पर्व मां दुर्गा की साधना और आराधना का पर्व है। इस दौरान भक्तों के द्वारा गरबे किए जाते हैं। प्रशासन को गरबा उत्सव के आयोजन को परंपरागत तरीके से इस साल भी रखना चाहिए। जैसे हर साल गरबे का आयोजन धूमधाम से मनाया जाता है, रात 12:00 तक गरबा किया जाता है ठीक उसी तरह इस साल भी गरबे का आयोजन करने की अनुमति प्रशासन को देनी चाहिए।
इसको लेकर कांग्रेस विधायक संजय शुक्ल का कहना है कि नवरात्रि उत्सव के दौरान होने वाले गरबे के आयोजन को चुनाव की राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। प्रशासन को गरबे को परंपरागत रूप से रात 12 बजे तक करवाने की अनुमति देनी चाहिए। आगे संजय शुक्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के द्वारा लागू की गई चुनाव आचार संहिता में ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग पर रात 10 बजे के लिए प्रतिबंध होता है।
चुनाव आयोग के द्वारा यह प्रतिबंध खास तौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को ध्यान में रखते हुए लगाने का प्रावधान किया गया है। इस स्थिति को जिला प्रशासन को भी समझना चाहिए। इस बारे में आवश्यकता होने पर राज्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय निर्वाचन आयोग से भी सलाह मशविरा किया जाना चाहिए। शुक्ला ने कहा कि मालवा में गरबा उत्सव का आयोजन रात को 8 बजे के बाद से शुरू होता है ऐसे में 10 बजे उसे बंद कर दिया जाएगा तो फिर यह आयोजन पूरी तरह से अव्यवस्थित हो जाएगा ।
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