गणेश पांडे, भोपाल। राज्य शासन ने एक आदेश जारी कर कैंपा फंड और पौधारोपण से संबंधित सभी वानिकी कार्य ठेकेदारों से कराए जाएंगे। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में भवन मरम्मत से लेकर गड्ढों की खुदाई से लेकर चैनलिंक फेंसिंग के कार्य निविदा के माध्यम से कराए जाएंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि विभाग हर साल इन कार्यों पर 1500 करोड़ रूपया खर्च करता है। विभाग के इस आदेश पर विभाग के अफसर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। वन विभाग के उप सचिव अनुराग कुमार के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि विभागीय निर्माण एवं मरम्मत कार्य निविदा प्रक्रिया के तहत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। किसी आदेश में कहा गया है कि वृक्षारोपण में वानिकी कार्य जैसे पौधा तैयारी, गड्ढा खुदाई, वृक्षारोपण, गैर वन क्षेत्र में पर्यावरण वानिकी कार्य और वन्यजीव क्षेत्रों में चैनलिंग फेंसिंग कार्य को निविदा के माध्यम से कराए जाएं। ठेकेदारी से कराए जाने वाले कार्यों के भुगतान के संबंध में बजट मद का निर्माण कर पुनर्विनियोजन का प्रस्ताव तत्काल भेजें। वन विभाग के इस आदेश से छोटे-छोटे ठेकेदार प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे। बड़े ठेकेदारों का नेक्सस सक्रिय हो जाएगा।
अभी तक क्या व्यवस्था थी
पौधरोपण से लेकर भवन मरम्मत के सभी कार्य डीएफओ अपने स्तर पर करते आ रहे हैं। मिट्टी और गोबर खाद, चैन लिंक के अलावा रेत, सीमेंट, गिट्टी की खरीदी वन मंडल अपने स्तर पर निविदा बुलाकर करता आ रहा है। इस प्रथा के कारण कई डीएफओ पर खरीदी में घपलेबाजी के आरोप लगाते रहे हैं। इस आदेश को लेकर शासन का तर्क है कि डीएफओ को जबरन जांच के दायरे में आने से बचाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है।
अफसरों ने उठाए सवाल
शासन के आदेश कई मैदानी आईएफएस अधिकारियों ने सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि वानिकी कार्य में बाहरी ठेकेदारों से काम कराना वन संरक्षण अधिनियम के विरुद्ध है। इस आदेश से बड़े ठेकेदारों और राजनेताओं का दबाव बढ़ जाएगा, बड़े ठेकेदारों द्वारा कराए जाने से गड़बड़ी की आशंका और बढ़ जाएगी।
Views Today: 2
Total Views: 148

