नवरात्रि के दौरान गरबे की समय सीमा तय, सिर्फ इतने घंटे ही होगा उल्लास

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मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर शहर में नवरात्रि की धूम सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। ये त्यौहार भक्तिभाव और उल्हास के साथ हर साल मनाया जाता है। नवरात्रि के दौरान युवक, युवतियां और महिलाऐं गरबा खेलने के लिए सज धज के गरबा पंडालों में जाते हैं और खूब गरबा खेलते हैं। लेकिन इस बार लोगों का क्रेज थोड़ा कम हो सकता है। दरअसल, इस बार गरबे की समय सीमा तय कर दी गई है।

आचार संहिता के चलते तय की गई समय सीमा

आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद आचार संहिता लागू कर दी गई है। जिसके चलते समय सीमा तय की गई है। ऐसे में गरबा आयोजकों को तय समय सीमा पर आयोजन बंद करना होगा। जहां हर साल रात 12 बजे तक गरबे का आयोजन चलता था वहीं इस साल ये सिर्फ 10 बजे तक ही चलेगा। आयोजकों को 10 बजे आयोजन बंद करना होगा। इस खबर के बाद सभी लोग निराश है।

निराश हुए युवक-युवतियां

नवरात्रि का त्यौहार ही एक ऐसा त्योहार है जिसमें सबसे ज्यादा रास उल्लास होता है। सबसे ज्यादा मजे भी लोग इसी दौरान लेते हैं और खुल कर गरबा करते हैं। लेकिन इस साल समय सीमा की वजह से उतना मजा लोग नहीं ले पाएंगे ना ही देखने वाले लोगों को ज्यादा मजा आएगा और ना ही खेलने वाले लोगों को। एक जोश चढ़ने के बाद उसे उतारना मुश्किल होता है। इसी वजह से लोग मायूस है।

इसी बीच कांग्रेस और बीजेपी के नेता के बयान आना भी शुरू हो गए हैं। मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी द्वारा शासन पर धर्म विरोधी होने का आरोप लगाया है। क्योंकि इस बार आचार संहिता के नाम पर गरबा महोत्सव को रात दस बजे तक सिमित करना हिटलरशाही है क्योंकि बड़े बड़े संस्था, मीडिया, मंडल आदि गरबा मोहत्सव का आयोजन करते हैं। बड़े पैमाने पर ये आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में इसे समय सीमा से बांधना गलत है। हमेशा परंपरागत आयोजन, त्यौहार आचार संहिता से बाहार होते हैं। इसलिए गरबे का समय 10 बजाए से आगे बढ़ाने की मांग भी उनके द्वारा की गई है।
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