
अनोखा तीर हरदा। करीबी ग्राम आलमपुर में चल रही शिव महापुराण के द्वितीय दिवस पं. सुशील जोशी ने कहा कि संसार में अधिकांश काम बिना फीस के नहीं होते हैं। स्कूल, कॉलेज, डॉक्टर, वकील और अन्य दूसरी जगह भी दूसरे रूप में फीस लगती है। जैसे संसार में फीस लगती है, भगवान के यहां शीश लगता है। उन्होंने आगे बताया भगवान के सामने आप छप्पन भोग रख दो, सोने के सिक्के चढ़ा दो, लेकिन जब तक शीश नहीं झुके। तब तक पूजन-साधना अधूरी मानी जाएगी। सिर्फ सामग्री से भगवान प्रसन्न नहीं होंगे। राजा बलि ने तो भगवान विष्णु के वामन अवतार के समक्ष तीन लोक की संपञ्त्ति रख दी थी। लेकिन भगवान प्रसन्न नहीं हुई थे। जब शीश झुकाया तब भगवान प्रसन्न हुए। हमेशा शीश झुकाते रहो। हमारे यहां तो ऐसे भक्त हुए हैं जिन्होंने शीश का दान कर दिया। बाबा खाटू श्याम ने भगवान के आगे अपना शीश ही दान कर दिया था। आज शीश दान की बात नहीं है। सिर्फ शीश झुक जाए यही काफी है। भगवान के सामने, संतों के सामने, माता-पिता के सामने शीश झुक जाए तो सारे काम हो जाएं। उन्होंने कथा प्रसंग में बताया कि सनातन धर्म में संसार से तरने के अनेक सरल साधन है। भगवान की कथा श्रवण करना, कीर्तन और मनन करना, इतने सरल साधन हंै कि कोई भी मनुष्य सत्कर्म से वंचित न रहे। क्योंकि मनुष्य जीवन बहुत अनमोल है। कहीं ऐसे ही न निकल जाए।आगे कथा प्रसंग में भगवान शिव का बह्मा, विष्णु के मध्य प्रगट होना, शिवरात्रि का महत्व आदि का विस्तार से वर्णन किया। यहां चल रही शिव महापुराण कथा को सुनने काफी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं।

