अनोखा तीर, भोपाल। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कनवर्सल सेंटर में भाजपा सरकार के 20 साल के रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हिसाब मांगा। शाह ने कहा हिम्मत है तो आपके 50 साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर आइए। कांग्रेस के लोगों को पूछना चाहता हूं कि आपने मध्यप्रदेश के साथ कितना न्याय किया, इसका हिसाब दीजिए। आंकड़े लेकर 9 करोड़ जनता के सामने आइए। उन्होंने कहा कि 2004 से 14 में जब सोनिया- मनमोहन सरकार थी, मध्यप्रदेश को 10 साल में सिर्फ 1 लाख 58 हजार करोड़ दिए। मोदी जी की सरकार ने 9 साल में 8 लाख 33 हजार करोड़ रुपए मध्यप्रदेश को देने का काम किया। इस दौरान शाह ने गरीब कल्याण महा अभियान की भी शुरुआत की।
बंटाढार को हटाना जनता का ऐतिहासिक निर्णय
2003 में श्रीमान बंटाढार की सरकार को हटाकर मध्यप्रदेश की जनता ने ऐतिहासिक निर्णय लिया। उमा भारती के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। इसके बाद उमा जी, बाबूलाल जी और शिवराज सिंह के नेतृत्व में बीमारू शब्द से मध्यप्रदेश को मुक्ति दिलाई गई। आज प्रदेश विकास की नई इवादत लिख रहा है।
हमने बजट का आकार बढ़ाया
मध्यप्रदेश सरकार ने शिवराज सिंह के नेतृत्व में ढेर सारे परिवर्तन किए। दाएं-बाएं भड़काए बगैर श्रीमान बंटाढार और कमलनाथ इन चीजों का स्पेसिफिक जवाब दें कि 2002 में आपने बजट का कुल आकार 23 हजार 100 करोड़ पर छोड़ा था, हमने इसे 3 लाख 14 हजार करोड़ पर पहुंचाया है। यह पूरे देश में दूसरे नंबर है। इसका जवाब देना चाहिए। पहले के बजट में 1 हजार 56 करोड़ खर्च करते थे। हमने इसे 64 हजार 390 करोड़ तक पहुंचाया। स्कूल की शिक्षा का बजट 2456 करोड़ से 38 हजार करोड़ पर पहुंचाया है। स्वास्थ्य का बजट 580 करोड़ था, आज 16 हजार करोड़ है। सर्व शिक्षा अभियान का बजट 844 करोड़ से 7 हजार करोड़ से उपर हो गया है।
जनता को देना चाहिए हिसाब
मध्यप्रदेश राज्य का गठन 1956 में हुआ। 50 से 2003 तक 53 साल में 6-7 साल छोड़कर पूरा समय कांग्रेस का शासन रहा। आज जो दावे कर रहे, उन्हें 53 साल का हिसाब देश और मध्यप्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। इन 53 साल में मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य का टैग मिला।
मीडिया के सवाल और शाह के जवाब…
सवाल : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में मध्यप्रदेश के संदर्भ में आपका और भारत सरकार का दृष्टिकोण क्या है?
जवाब – मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा का प्रचार मोदी जी और शिवराज जी के समय में हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जो क्षेत्र है, वो उच्च शिक्षा के बिना संभव नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जो भी विकास देशभर में होगा, उच्च शिक्षा के बिना संभव नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में इसका रॉ मटेरियल, बच्चे तैयार करने, युवाओं को तैयार करने के काम यहां बहुत अच्छे तरीके से हुए हैं। मुझे मध्य प्रदेश के युवाओं की क्षमता पर विश्वास है, जरूर इस क्षेत्र में भी अपना दम दिखाएंगे और देश में अच्छा स्थान हासिल करेंगे।
सवाल : ये मानें कि आप 2023 और 2024 में चुनाव को डेव्हलपमेंट के मुददे पर ही लेकर आएंगे?
जवाब– हम चाहते हैं कि चुनाव विकास के मुद्दे पर हों। कांग्रेस की परंपरा जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण के आधार पर चुनाव को घसीटकर ले जाना। मोदी जी ने पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस की नई परंपरा शुरू की है। हमने हमारे सारे एजेंडे को भी समाप्त किया है। धारा 370 को भी समाप्त किया है। राम मंदिर का निर्माण भी तेजी से हो रहा है। यहां महाकाल लोक भी बना है। हम जरूर चाहेंगे कि चुनाव डेवलपमेंट और गरीब कल्याण के मुद्दे पर हो।
सवाल : 15 महीने की कमलनाथ सरकार का जिक्र किया? क्या इनका काम भाजपा के लिए चुनौती है? भाजपा आरोप पत्र लाएगी?
जवाब– मैंने आज आरोप लगा ही दिए हैं। जवाब देना चाहिए उनको। इन्हें मध्य प्रदेश की जनता के सामने आना चाहिए। हिम्मत हैं तो जवाब दें।
सवाल : क्या यह सही है कि चुनाव जीतने के बाद शिवराज जी मुख्यमंत्री रहेंगे?
जवाब– अभी शिवराज जी मुख्यमंत्री ही हैं, पार्टी का काम पार्टी करेगी।
सवाल : अभी जो टिकिट वितरण हुआ है उसमें परिवारवाद है?
जवाब– परिवारवाद की जब हम बात करते हैं तो पार्टी की मिल्कियत की बात करते हैं। आप क्या कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश की मिल्कियत कोई परिवार की है। आप मुझे बताइए, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) … मैं नेताओं के नाम नहीं लेना चाहता। परिवारवाद का मतलब है सरकार और शासन में एक ही परिवार के व्यक्ति आएंगे। कहीं इक्का-दुक्का किसी के परिवार को योग्यता के आधार पर टिकट दिया, ये परिवारवाद का मुद्दा डाइल्यूट करना है। परिवारवाद मतलब- पार्टी की मिल्कियत, सत्ता की मिल्कितय एक परिवार के हाथ में रहना।
सवाल : हाल ही में इन्हीं मुददों के कारण आपकी सरकार नहीं बनी?
जवाब– आप सिर्फ दो राज्यों की ही क्यों बात करते हैं, हमारी मणिपुर से लेकर कई राज्यों में सरकार बनी है।
सवाल : आपने कई मुफ्त की घोषणाएं कीं, इन्हें कैसे लागू करेंगे, बजट का क्या प्रावधान है, ऐसा क्या करेंगे कि प्रदेश की जनता पर प्रभाव नहीं पड़े?
जवाब– हमने ये घोषणाएं चुनाव के समय नहीं कीं। हर घर में शौचालय 2015 में आई, 2020 में हर घर नल आई, हमारी योजनाएं और चुनाव का संबंध नहीं है। रही बात गरीब को रेवड़ी बांटने वाली बात की तो गरीब को भी समझ है कि मोदी जी ने एक लाख का घर दिया और कोई 200 रुपए का बिल माफ करेंगे तो वह एक लाख का घर भूलकर 200 रुपए बिल माफी पर वोट नहीं करेगा। हमारा विश्वास गरीब को गरीबी से बाहर निकालना और उसकी आय बढ़ाना है।
सवाल : 2018 के चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा, लेकिन सीट घटी, उस समय क्या कमी रही, जो 2023 में पूरी हो गई है?
जवाब– 2015 से कांग्रेस ने सोची-समझी रणनीति के तहत गुजरात, एमपी, राजस्थान और कई राज्यों में जाति के आंदोलन खड़े किए। जातिवाद का जहर जनता में घोलने का प्रयास किया। 2018 का चुनाव जातिवाद के घोले हुए जहर की परछाई में हुआ, फिर भी हमें कांग्रेस से 1 लाख वोट ज्यादा मिले। इस बार उनके 15 महीने का शासन भी देख लिया है। हम बहुत बढ़े बहुमत के साथ हम सरकार बनाने जा रहे हैं।
सवाल : दिग्विजय का आरोप है कि एमपी में नूंह की तरह भाजपा दंगों की प्लानिंग कर रही है?
जवाब – दिग्विजय सिंह का ऐसा ही स्वभाव है। जो आदमी के मन में होता है, ऐसी ही बात मुंह से निकलती है। एक महीने बाद दिग्विजय को पूछ लेना कि दंगा क्यों नहीं हुआ।
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