59 वर्ष पुराने धूने पर संतो का तप

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अनोखा तीर, हरदा। ज्येष्ठ माह की तपती दोपहरी में चिलचिलाती धूप में पलभर खड़े रहने में गर्मी का आभास तय है। धूप की असहनीय चुभन खुद को गहरी छांव व ठंडी हवा की ओर खींच ले जाती है। वहीं दूसरी ओर साधु-संत अपने अखाड़ों की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए इसी तीखी धूप के नीचे धूनी तपते हैं। धूनी से आशय है कि भर दोपहर 1 बजे यह साधना प्रारंभ होती है, जो डेढ़ से दो घंटे यानि दोपहर 3 बजे तक चलती है। इस दौरान साधु अग्नि कुंड के बीच बैठकर तपते हैं। ऐसा ही एक तपस्वी नजारा शुक्रवार को भक्तों ने रेलवे माल गोदाम स्थित सिद्ध स्थल मस्तराम आश्रम में देखा। जहां ४० से 41 डिग्री तापमान में रामलला खालसे के संत तपती दोपहरी में धूनी तप रहे थे। करीब दो घंटे चले तप दौरान चारों तरफ कंडो से निर्मित अग्नि कुंड से गर्म आंच एवं लपटे उठ रही थी। कड़े तप के दर्शन प्राप्त कर भक्तों ने सीताराम का जाप किया। वहीं हनुमान चालीसा भी पढ़ी। सेवकों से मिली जानकारी के अनुसार हरिद्वार से त्यागी महत्माओं की मंडली का मस्तराम आश्रम में आगमन हुआ। इस अवसर पर संत सेवा के मध्य नियमित साधना के निमित्त श्री देवेन्दर दास महाराज एवं श्री ओमदास महाराज ने धूनी तप किया। इस मौके पर महंत श्री रघुरामदास महाराज, खालसा अधिकारी श्री कौशल दास महाराज का सानिध्य रहा। अंत में संत-महात्माओं ने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।

बसंत पंचमी से गंगा दशहरा

संतो ने बताया कि धूनी तप बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर गंगा दशहरा तक चलता है। इस बीच नियमित धूनी तप का खास महत्व है। इस समयावधि में साधु जहां भी रहे, वहां धूनी तप जारी रहता है। गंगा दशहरा के बाद चतुर्मास प्रारंभ होता है।

59 वर्ष से चैतन्य प्राचीन धूना

उल्लेखनीय है कि प्राचीन मस्तराम आश्रम में 59 वर्ष से धूना चैतन्य है। आश्रम में देशभर के विभिन्न मठ-मंदिर एवं आश्रमों से साधु-संतो का यहां पधारने का सिलसिला चलता रहता है। संत सेवा की दृष्टि से संत जगत में आश्रम की विशेष पहचान है।

 

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