इजरायल में मिला 2500 साल पुराना टॉयलेट, सैंपल से पेट की खतरनाक बीमारी का खुलासा, वैज्ञानिक भी हैरान

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यरूशलम: वैज्ञानिकों को यरुशलम में एक ऐसा टॉयलेट मिला है जो उस जमाने के लोगों की स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी आदतों के बारे में बताता है। इस टॉयलेट के मिलने के साथ ही वैज्ञानिकों को इस बात का भी यकीन हो गया है कि उस समय लोग अपने स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जागरूक नहीं थे। वैज्ञानिकों ने 2500 साल पुराने टॉयलेट सैंपल्‍स की टेस्टिंग के बाद यह निष्‍कर्ष निकाला है कि लौह युग में लोगों की आदतें स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ठीक नहीं थीं। रिसर्चर्स ने पत्‍थर के दो शौचालयों के नीचे के गड्ढों से खुदाई की थी। उन्‍हें इस दौरान पेचिश पैदा करने वाले जीवाणुओं के सबूत पाए हैं।

एलीट फैमिली के टॉयलेट्स


ये टायलेट्स एलीट परिवारों के थे। कहा जाता है कि उस समय यरूशलम, अश्शूर साम्राज्य के दौरान एक राजनीतिक और धार्मिक केंद्र था। यहां पर उस समय आठ से 25 हजार तक लोग रहते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये टायॅलेट्स जियार्डिया डुओडेनैलिस नामक बीमारी का सबसे पहला प्रमाण हैं। हालांकि पेट का इनफेक्‍शन, जो दस्त, पेट में ऐंठन और वजन घटाने की वजह बनता है, उसकी पहचान सबसे पहले रोमन-युग के तुर्की और मध्यकालीन इजरायल में हुई थी। रिसर्च में शामिल डॉक्‍टर पियर्स मिशेल ने बताया, ‘पीने के गंदे पानी या प्रदूषित भोजन से पेचिश होती है और हमें शक है कि यह पुराने समय में ज्‍यादा भीड़, गर्मी और मक्खियों के अलावा गर्मियों में सीमित पानी की मौजूदगी से एक बड़ी समस्या हो सकती थी।’ यह रिसर्च साइंस मैगजीन पैरासिटोलॉजी में पब्लिश हुई है।

हवेली की गई थी खुदाई

इस रिसर्च को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विभाग की तरफ से पूरा किया गया है। रिसर्चर्स ने साल 2019 में यरुशलम के दक्षिण में एक टॉयलेट सीट मिली थी। यह टॉयलेट सीट अरमोन हा-नत्‍जीव हवेली के पड़ोस में थी। माना जा रहा है कि यह शायद राजा मनश्शे के दिनों की है। उन्‍होंने ईसा पूर्व सातवीं शताब्दी के मध्य में 50 वर्षों तक शासन किया था। चूना पत्थर से बने इस शौचालय में शौच के लिए एक बड़ा सा छेद था और पुरुषों के पेशाब के लिए बगल में एक छेद होने की संभावना है।

आज भी बच्‍चों में होती बीमारी

एक और टॉयलेट सीट की ओल्ड सिटी ऑफ यरुशलम में हाउस ऑफ अहील के रूप में जानी जाने वाली सात कमरों की इमारत में मिली है। माना जा रहा है कि यह शायद उच्च वर्ग के परिवार का घर रहा होगा। रिसर्चर्स को इस दौरान चार प्रकार के आंतों के परजीवी – टेपवर्म, पिनवॉर्म, राउंडवॉर्म और व्हिपवॉर्म के अंडे भी मिले थे। लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक पेचिश पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव नाजुक और बेहद कठिन हैं। जियार्डिया की वजह से होने वाली पेचिश से वर्तमान समय में ज्‍यादातर बच्‍चों की जान जाती है। इस बीमारी से संक्रमित बच्‍चों के मानसिक विकास भी रुक जाता है।

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