अजातशत्रु शब्द नहीं शब्दकोश है

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– अनिल दुबे
अधिवक्ता, हरदा

कल अचानक से मेरे पास प्रहलादजी शर्मा का फोन आया। दुआ सलाम के बाद उन्होंने अचानक से मेरे ऊपर बम फोड़ते हुये कहा कि भाई ..( वो इसी प्रकार स्नेह से मुझे बुलाते रहे हैं) इस बार अजातशत्रु साहब के जन्मदिन पर कुछ करने का मन है जो हम लोगों की ओर से उनके अपार स्नेह के बदले होगा..आप कुछ फोटो और दो शब्द उनके लिए लिख दें ..अब आप अंदाजा नहीं लगा सकते मेरी क्या हालत हुई हाँ बोलते में अंदर से पूरी तरह नर्वस था, मुझे पहली बार लगा आप कितने भी सक्सेस क्यूँ न हो जाएं लोग चाहे जितना आपकी तारीफ क्यूँ न करते हों पर एक दिन ऐसा कोई सब्जेक्ट आपके सामने आएगा जो आपको आपकी सही जगह दिखा जाएगा ..बस मेरे गले को सुखाने के लिए सिर्फ एक शब्द ही बहुत था। भाई शर्मा जी से तो यस बोल दिया लेकिन फिर सोचा कि भाई सूरज के विषय में लिखोगे क्या..? अजातशत्रु एक शब्द नहीं हैं एक पूरा शब्दकोश हैं क्या लिखेगा कोई उन पर जो व्यक्ति एक चलती फिरती लाइब्रेरी है.. यार छोटे से छोटे और गाँव के अंतिम व्यक्ति तक को जो कभी ये एहसास न होने दे कि तुम छोटे हो। छोटी सी छोटी बात को इतनी गम्भीरता से लेकर उसको सही नजरिये से रखना कोई छोटा काम है क्या भला? अब ऐसे व्यक्ति पर आप क्या लिखोगे? मुझसे जब भी मिलते हैं पूछना नहीं भूलते कि कैसा चल रहा है काम? फिर धीरे से बोलेंगे कोई केस की बात सुनाओ न कोई हारता हुआ केस कैसे जीता, बाजी कैसे पलटी खाई…वगैरा वगैरा। और मैं बाध्य होकर खुशी खुशी उन्हें कोई न कोई केस हिस्ट्री जरूर सुनाता। आप भरोसा नहीं करेंगे वो व्यक्ति मुझे इतना इंसपायर करते हैं कि मैं बयान नहीं कर सकता। उस शख्श से बात करते हुये जिंदगी कट सकती है पर बातें और ज्ञान कभी खत्म नहीं होता। एक बार राजनीति को लेकर मैंने कुछ ऐसा कहा जो निराशा से भरा था। आप बोले एक शेर सुनो ‘तू देखता चल ये नदी सारे पत्थरों को गोल कर देगीÓ मैं सही कहूँ आज भी कोई कठिन से कठिन बात भी मुझे निराश नहीं करती।
बस ये शेर मुझे हौंसला देता रहता है। स्कूल में भी छोटे-छोटे बच्चों के कार्यक्रम को पूरा देखकर उनके माता पिता को आखिर में रियलाईज करा देते थे कि आपका बच्चा बहुत होनहार और काबिल कलाकार भी है। पढाई के साथ ऐसी बहुत सी बातें हैं जो मुझ में समाई हुई है। आपके जन्मदिन पर ईश्वर से प्रार्थना है कि ये ज्ञान का भंडार ता कयामत सलामत रहे!! और मैं कुछ भी कहूँगा वह सब सूरज को दिया दिखाने से अधिक नहीं हो सकता। बस अपनी बात को आपके ही शेर के साथ विराम देना चाहूँगा कि ‘निगाहे नीम बिस्मिल का असर देखिए, दूर तक रोता हुआ कातिल गया।
अजातशत्रु जी किसी के लिए कुछ भी हो मेरे लिये ज्ञान का भंडार और प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे… आपको हृदय से प्रणाम करता हूं।

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