कल्पनाओं से परे है नवाचार

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अनोखा तीर, हरदा। आज जिले में सतपुड़ा पर्वत माला के मुहाने पर बसे वनांचल के प्रवेश द्वार रहटगांव आ रहे प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को किस पदनाम से संबोधित करूं। किसान पुत्र, किसानों के हमदर्द, लाड़ली लक्ष्मी के मामा, लाड़ली बहनों के भैय्या, बुजुर्गो के श्रवण कुमार, वनवासियों के हितचिंतक, जरुरतमंद गरीबों के मसीहा, जनता को भगवान मानते हुए पूजा करने वाला पुजारी या प्रदेश का मुख्य सेवक। बीते 16 वर्षों के कार्यकाल में जितने किरदार निभाते हुए मैंने शिवराजसिंह को देखा है उसके बाद तो कुछ तय कर पाना मेरे लिए मुश्किल प्रतीत हो रहा है। इसलिए क्या उपयुक्त होगा इस लोकनायक के लिए यह आप ही तय कीजिए। बहरहाल आज तो वह अपनी लाड़ली बहनों के बीच भैया का किरदार निभाने आ रहे हैं। उन बहनों से मिलने आ रहे जिनके लिए अपनी सरकार के माध्यम से अपनी नवाचारों की श्रृंखला में एक ओर कड़ी जोड़ते हुए लाड़ली बहना योजना लागू की है। मध्यप्रदेश के इतिहास में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सोलह साल का कार्यकाल नवाचारों के लिए भी पहचाना जाएगा। यह मैं केवल शिवराज सिंह की तारीफों के पुल बांधने के लिए नहीं कह रहा हूं बल्कि 1956 के बाद से प्रदेश के इतिहास पर नजर डाली जाए तो किसी भी शासक के शासनकाल में लोकहित के ऐसे और इतने नवाचार नहीं किए गए। बल्कि यह कहना भी अनुचित या अतिश्योक्ति नहीं होगा कि किसी भी शासक की कल्पनाओं से परे है शिवराज सिंह के नवाचार। जिनके चलते सरकार के प्रति लोगों का रवैया ही बदल गया। आज प्रदेश में ऐसा कोई वर्ग या समुदाय अथवा क्षेत्र नजर नहीं आता जिनके हितार्थ शिवराज सरकार की योजनाएं क्रियाशील न हो। बेटियों को गरीब मां बाप के सिर पर बोझ समझने वाली सोच को शिवराज सिंह की लाड़ली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ने पूरी तरह बदल कर न केवल लिंगानुपात में परिवर्तन लाया, बल्कि बेटियों का जन्म अब सौभाग्य में तब्दील हो गया। स्वयं के कृषक पुत्र होने के नाते किसानों के हितार्थ जिस समर्पित भाव से योजनाएं बनाई उससे किसान अब मजबूर की श्रेणी से निकल कर मजबूत नजर आने लगा है। प्राकृतिक आपदा हो चाहे बाजार में अपने उत्पाद की बिक्री दौरान बिचौलियों व व्यापारियों के हाथों लूटने की मजबूरी से बाहर निकालकर हर संकट की घड़ी में किसानों का तारणहार बनती रही है शिवराज सरकार। यही कारण था कि जब पन्द्रह माह का कांग्रेस शासनकाल आया तो शिवराज की कमी का सर्वाधिक अहसास प्रदेश के किसानों को ही हुआ था। जब फसल बीमा और राहत राशि से वंचित रहना पड़ा था। लेकिन शिवराज सरकार के वापस आते ही जहां पिछली बीमा राशि का भुगतान करवाया वहीं वर्ष 2020-21 में हुई फसल क्षतिपूर्ति के लिए 49 लाख 85 हजार किसानों के खाते में एक क्लिक के माध्यम से 7 हजार 615 करोड़ रुपए की बीमा राशि का भुगतान करते हुए कोरोना काल में भी राहत प्रदान करने का कार्य किया। इस विश्वव्यापी महामारी के दौर में जब सारे काम काज बंद थे तब भी सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का रिकॉर्ड मध्यप्रदेश के नाम दर्ज किया। हरदा नर्मदापुरम के किसानों को इस कोरोना काल में ही ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए तवा नहर से पानी देकर मूंग उत्पादन और खरीदी का भी रिकॉर्ड बनाया। देश में मध्यप्रदेश ऐसा इकलौता राज्य है जहां बीमारी के दौरान इलाज के सर्वाधिक आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री सहायता कोष से लोगों को दी जाती है। कहने का आशय यह कि हर संकट की घड़ी में प्रदेश की जनता के बीच शिवराजसिंह चौहान संबल बनकर खड़े नजर आते हैं। आज प्रदेश में सबसे लंबे समय मुख्यमंत्री रहने का इतिहास रचने वाले शिवराजसिंह के व्यक्तित्व में कभी शासक का भाव नजर नहीं आता बल्कि वह सेवक के रूप में ही नजर आते रहे हैं। तभी तो उन्होंने मध्यप्रदेश को अपना मंदिर यहां की जनता को भगवान और स्वयं को पुजारी की संज्ञा दी है। अगर हम बीते 16 वर्षों के उनके कार्यकाल पर नजर डालें तो उन्होंने सही मायने में पुजारी बनकर ही सेवा की है। आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हो, चाहे आदिवासियों को उनके हक दिलाने के लिए पैसा एक्ट लागू करना हो अथवा हाल ही में भूमिहीनों के लिए आवासीय पट्टे देने वाली आनलाइन आवेदन की पहल या फिर असहाय बुजुर्गो को हवाई जहाज से तीर्थ दर्शन कराने की योजना ऐसी कल्पनाएं केवल शिवराज सिंह ही करते हुए अपनी सरकार की योजनाएं बनाकर उन्हें धरातल पर उतारने का कार्य कर सकते हैं। निरंतर आम जनता के बीच पहुंचकर जनमानस टटोलते हुए जनकल्याण की योजनाएं बनाकर उन्हें हकीकत में तब्दील करने वाले शिवराजसिंह चौहान को महज एक मुख्यमंत्री तो नहीं कहा जा सकता। ऐसे लोकनायक के संबोधन हेतु मेरे शब्दकोष में तो कोई शब्द नजर नहीं आता। इसलिए पाठकों पर ही निर्णय छोड़ता हूं। जिसकी जुबान पर हमेशा रामायण की चौपाई और गीता के श्लोक हो, जिसके हाव-भाव में लोककला और संस्कृति की झलक हो और अपनेपन का एहसास हो, जिसके जहन में सर्वहारा वर्ग की चिंताएं हो वह भला कभी किसी से छल कैसे कर सकता है। तभी तो वह प्रदेश की सत्ता पर नहीं बल्कि लोगों के दिलों पर राज करते हैं।

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