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Friday, 9 October 2026
हरदा

OLD AGE PENSION साहब याद नहीं पिछले वर्ष मैं जिंदा था या नहीं!

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अनोखा तीर, हरदा। साहब अब बूढ़ा हो चुका हूं, याददाश्त भी कमजोर हो गई है इसलिए पता नहीं मैं पिछले वर्ष भी जिंदा था या नहीं। हां लेकिन इस वर्ष जिंदा हूं। इस बात का दस्तावेजी प्रमाण मैंने आपको भेज दिया है, आपको मिल भी चुका है, मेरे लिए इतना ही काफी है। यह जवाब था एक वृद्ध पेंशनर का जो उसने बैंक से आए पत्र के जवाब में लिख कर भेजा था। सरकारी विभागों में किस प्रकार से कामकाज होते हैं इसकी एक झलक मात्र है। एक वृद्ध पेंशनर को बैंक से पत्र दिया गया कि आपका इस वर्ष जीवित होने का प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त हो गया है, धन्यवाद। लेकिन खेद है कि आपने पिछले वर्ष अपने जीवित होने का कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया था। हमारे लेखा विभाग में इस बात का उल्लेख अपनी रिपोर्ट में किया है। अत: आपसे अनुरोध है कि आप पिछले वर्ष के अगर कोई दस्तावेज उपलब्ध करा दें जिससे यह सिद्ध हो सके कि आप पिछले वर्ष भी जिंदा थे। जिस प्रकार बैंक द्वारा पत्र दिया गया उसी प्रकार पेंशनर में भी पत्र उत्तर भेज कर अपनी बात कही। पेंशनर ने लिखा कि महोदय आप का पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें मुझसे पिछले वर्ष भी जीवित होने का दस्तावेजी प्रमाण मांगा गया है। मुझे खेद है कि मेरे पास ऐसा कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। वैसे भी साहब मैं अब काफी बुजुर्ग हो चुका हूं, मेरी याददाश्त भी काफी कमजोर हो गई। इसलिए मुझे ठीक से याद नहीं है कि मैं पिछले वर्ष भी जिंदा था या नहीं। लेकिन हां, इस वर्ष तो अभी तक जिंदा हूं यह दावे से कह सकता हूं। यह वैसे पढऩे सुनने में आपको थोड़ा अजीब सा या हास्यास्पद लग सकता है। लेकिन यह विडंबना है कि हमारे सरकारी दफ्तरों में और बैंकों में इसी तरह की कार्यशैली अपनाई जाती है। बरसों बरस तक शासकीय विभागों में सेवा देने वाले अधिकारी कर्मचारियों को प्रतिवर्ष अपने जीवित होने का प्रमाण तो देना पड़ता है, जो प्रक्रिया की दृष्टि से उचित भी है। लेकिन विभागीय अधिकारी कर्मचारी कितने लकीर के फकीर होते हैं या उनकी भाषा शैली किस तरह की होती है उसका यह एक उदाहरण मात्र है।

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