दिनेश निगम ‘त्यागी
क्या सच में हो गया नरोत्तम की राजनीति का पटाक्षेप….?
प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा हालांकि दतिया विधानसभा सीट के उप चुनाव में भाजपा की पराजय के बाद कह चुके हैं कि अब उनकी राजनीति का पटाक्षेप हो गया। अब उन्हें पद की कोई अभिलाषा नहीं। वे चाहते हैं कि पार्टी नेतृत्व एक कार्यकर्ता के नाते उन्हेंं काम देता रहे। नेतृत्व ने दतिया के टिकट को लेकर उनकी बात भले न सुनी हो लेकिन उनकी इस अभिलाषा का ख्याल रखा, इसीलिए पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम में नरोत्तम को जगह नहीं दी। जबकि इस बड़े नेता को संगठन में पद देकर उनका राष्ट्रीय राजनीति में उपयोग किया जा सकता था। जब नरोत्तम का टिकट कटा था तभी यह संभावना व्यक्त की जाने लगी थी कि दतिया में भाजपा जीते या हारे ठीकरा नरोत्तम के सिर ही फूटेगा। जीती तो मैसेज जाएगा कि नरोत्तम का टिकट काट कर पार्टी ने ठीक किया और हारी तो कहा जाएगा कि नरोत्तम ने हरवा दिया। इधर नरोत्तम दतिया पहुंचे तो समर्थकों ने उनका नायक की तरह स्वागत किया। इसे पार्टी नेतृत्व किस तरह लेता है, आने वाला समय बताएगा। वैसे पार्टी के रुख को देखकर लगता है कि नरोत्तम को तरजीह नहीं मिल रही। वे दतिया टिकट कटने और उप चुनाव के बाद दो बार दिल्ली गए लेकिन किसी बड़े नेता ने उन्हें मिलने तक का समय नहीं दिया। राष्ट्रीय टीम में जगह न मिलना भी इसी का संकेत है।
शिवराज की मुहिम 2028 की तैयारी का हिस्सा तो नहीं….!
दतिया उप चुनाव में पराजय के बाद या तो प्रदेश भाजपा का हर बड़ा नेता अपने लिए नई संभावनाएं तलाशने लगा है या फिर पार्टी नेतृत्व इनकी नई भूमिकाओं को लेकर मंथन कर रहा है। उप चुनाव के बाद इन दिग्गजों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकातें इसका संकेत दे रही हैं। शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, वीडी शर्मा और ज्योतिरािदत्य सिंधिया से हुई मुलाकातों का कोई ब्यौरा भले सामने नहीं आया लेकिन अचानक इन बड़े नेताओं की मोदी, शाह और नबीन से आधा से एक घंटे तक की चर्चा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इनमें से वीडी को तो नबीन की टीम में जगह मिल गई लेकिन अन्य दिग्गजों के बारे में फैसला होना शेष है। कैलाश ने शाह से लंबी मुलाकात के तत्काल बाद प्रहलाद पटेल से मुलाकात की। मोदी से मुलाकात के बाद शिवराज के घर प्रदेश के सांसदों का जमावड़ा हुआ। शिवराज की सक्रियता से इन कयासों को बल मिला है कि वे वर्ष 2028 के चुनाव को लेकर कमर कस रहे हैं। इसी कारण केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद वे मप्र में ज्यादा सक्रियता दिखा रहे हैं। संभवत: उनके अंदर इस बात को लेकर अब तक टीस है कि प्रदेश में उनके कारण भाजपा सत्ता में लौटी, लेकन वे मुख्यमंत्री नहीं बन सके। यह बात कभी उन्हें लेकर उमा भारती भी कहती थीं।
अब प्रदेश की राजनीति में ही रमेंगे भाजपा के ये दिग्गज….!
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम को लेकर संभावना व्यक्त की जा रही थी कि प्रदेश से पार्टी के तीन दिग्गजों को केंद्र की राजनीित में ले जाकर संगठन में महत्वपूर्ण जवाबदारी सौंपी जाएगी। ये दिग्गज हैं प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह। इनमें से कैलाश और प्रहलाद केंद्रीय राजनीति कर चुके हैं और इनका मुख्यमंत्री के साथ सामंजस्य भी नहीं बैठ रहा। कैलाश कई बार अपनी उपेक्षा की ओर इशारा कर चुके हैं जबकि प्रहलाद ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के सवाल पर कहा था कि वे टिकट की परवाह नहीं करतेे। वे कभी भी नमस्ते करने को तैयार बैठे हैं। दोनों पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। इसलिए माना जा रहा था कि इन्हें केंद्रीय टीम में जगह देकर केंद्र की राजनीति में ले जाया जाएगा। तीसरे राकेश सिंह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ कर मंत्री बने हैं। वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और हमेशा लोकसभा चुनाव लड़ते रहे हैं। पर सभी संभावनाओं को दरकिनार करते हुए नितिन नबीन इनमें से किसी दिग्गज को टीम में नहीं लिया। साफ है कि ये प्रदेश की राजनीित में ही जमेंगे। इनके स्थान पर अपेक्षाकृत नए चेहरों को प्रदेश से स्थान दिया गया। इनमें वीडी शर्मा, कविता पाटीदार, गजेंद्र पटेल, बंशीलाल गुर्जर, आशीष अग्रवाल शामिल हैं।
पीडब्ल्यूडी मंत्री से खफा भाजपा के ये वरिष्ठ विधायक….!
प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और भाजपा के वरिष्ठ विधायक पूर्व मंत्री अजय विश्नोई एक ही अंचल और एक ही जिले जबलपुर से हैं, पर लगता है दोनों के बीच पटरी नहीं बैठ रही। यही वजह है कि खराब सड़कों और काम में विलंब को लेकर मंत्री जी विश्नोई के निशाने पर रहते हैं। उन्होंने सड़कों की खराब हालत पर सवाल उठाते हुए सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार जब काम पूरा करने निकलते हैं तो रिश्वत की रकम कम ही नहीं होती। इससे सड़कों की क्वालिटी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। विश्नोई ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर सड़कों की हालत सुधारने की मांग उठाई है। कई सड़कों का जिक्र करते हुए निर्माण में लेटलतीफी और गुणवत्ता पर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को लेकर भी व्यंग्यात्मक बयान भी दिया था। उन्होंने कहा था कि पीडब्ल्यूडी मंत्री जिन सड़कों की आधारशिला रखते हैं, वे कभी पूरी नहीं हो पातीं। साफ है कि विश्नोई और राकेश सिंह के बीच सब ठीक नहीं है।
भाजपा के लिए मुसीबत का कारण बन रहे ये विधायक….
भाजपा के दो बड़बोले विधायक अपने विवादित बयानों के कारण पार्टी के लिए मुसीबत का कारण बने हुए हैं। इनके बयान चाहे जब प्रदेश नेतृत्व को असहज कर देते हैं। पार्टी इन पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रही है। पार्टी इन्हें कई बार समझाइश दे चुकी लेकिन इन पर कोई असर नहीं हुआ। ये विधायक हैं गुना के पन्नालाल शाक्य और पिछोर के प्रीतम सिंह लोधी। पन्नालाल ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में रामायण और महाभारत का उल्लेख कर महिलाओं पर विवादित बयान दिया। उन्होंने माता सीता को मौत का सामान कह दिया। उन्होंने कहा कि उनके कारण युद्ध हुआ लेकिन एक भी महिला नहीं मरी, सिर्फ पुरुषों का विनाश हुआ। इसी प्रकार महाभारत द्रोपदी के कारण हुआ। इस युद्ध में भी कोई महिला नहीं मरी, सिर्फ पुरुष मरे। शाक्य यहीं नहीं रुके, उन्होंने अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने कन्नौज से लेकर अजमेर तक अपने सारे सावंत मरवा दिए। यहां भी आदमी मरें, महिलाएं नहीं। यह समझने की जरूरत है। इसी प्रकार विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि विरोधी डाक बंगले में मेरे पास महिलाओं को भेजते हैं ताकि वीडियो बना कर मुझे रेप के केस में फंसा सकें। इनके टारगेट में मेरा बेटा भी होता है। भाजपा विधायकों के ऐसे बयानों से संगठन और सरकार असहज है। उसे सूझ नहीं रहा कि वह इन विधायकों को कैसे समझाए?
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