नागद्वारी आस्था का केंद्र जहां दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु और रोमांचक यात्रा के राही  


नितिन दत्ता, तामिया/छिन्दवाड़ा। हर साल खासकर महाराष्ट्र से नागद्वार पद्मशेष भगवान के दर्शन के लिए भक्त दुर्गम और असाध्य मार्ग से चलकर नागद्वारी आते हैं। 8 से 17 अगस्त तक जारी इस यात्रा में प्रशासन और एसटीआर ने कई व्यवस्था की हैं। नागद्वारी मेले में भक्त नागद्वार गुफा में विराजित भगवान पद्मशेष के दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि पद्मशेष भगवान मन्नतों को पूरा करते हैं। इसलिए सात पहाड़ों को पार करके लगभग 20 किमी से अधिक की कठिन यात्रा करके श्रद्धालु नागद्वार गुफा तक पहुंचते हैं। नागद्वारी को लेकर कई रहस्यमयी कहानियां भी हैं। कुछ लोग इस गुफा को पाताल लोक का प्रवेश द्वार मानते हैं। कुछ श्रद्धालु इसे भगवान शंकर के गले में विराजित नाग देवता का घर मानते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य के बीच दुर्गम और कठिन यात्रा
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में पचमढ़ी के घने वन क्षेत्र में सतपुड़ा पर्वत श्रेणी में बसा पर्यटन क्षेत्र पचमढ़ी में स्थित नागद्वारी धार्मिक क्षेत्र प्रसिद्ध स्थल है जो वर्ष में 10 दिनों के लिए ही खुलता है। इस साल 08 से 17 अगस्त तक चलेगा। नागद्वारी यात्रा हर साल श्रावण मास की नागपंचमी के अवसर पर अगस्त महीने में नागपंचमी से लगभग 10 दिन पहले शुरू होती है। इस साल 8 अगस्त से शुरू होकर 17 अगस्त तक चलेगी। यह यात्रा होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी के पास धूपगढ़ मार्ग जलगली और जिप्सी के मार्ग कजरी ग्राम से होकर गुजरती है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कारण अब गांव तो विस्थापित हो गए लेकिन पड़ाव का नाम आज भी पुराने ग्राम कजरी है। पचमढ़ी से 30 किमी इस क्षेत्र में जिप्सी पहुंचती है। इस यात्रा की व्यवस्था छिंदवाड़ा जिले और होशंगाबाद जिले मिलकर करते हैं। नागद्वारी की यात्रा खासकर धार्मिक महत्व की पदयात्रा छिन्दवाड़ा जनपद पंचायत जुन्नारदेव के ढाकरवाडी ग्राम पंचायत के ग्राम निमोटी में नागदेव मंदिर से शुरू होती है। यात्री वाहन या पैदल मार्ग से नागद्वारी की यात्रा करते हैं। यात्री पैदल मार्ग से नागदेव मंदिर के दर्शन करने के बाद दमुआ से होते हुए कांगला, मच्छदरनाथ, गोरखघाट, सतघरी होते हुए ग्राम पंचायत झापिया के नागथाना से आलमोद से काजरी होते हुए नागद्वारी जाते हैं। यहां यात्रा लगभग 30 किलोमीटर की होती है और यह 3 दिन की होती है। वहीं वाहनों से पचमढ़ी से धूपगढ़ होते हुए पदयात्रा एक दिन में पूरी हो जाती है। यात्री सतपुड़ा के ऊंचे पहाड़ों और झरनों, नदियों और नालों को पार करते हुए पैदल यात्रा करते हैं। वाहन से यात्री ग्राम पंचायत ढाकरवारी के ग्राम निमोटी में नागदेव मंदिर के दर्शन के बाद जुन्नारदेव, विषाला होते हुए तामिया से पचमढ़ी पहुंचकर धूपगढ़ से पैदल नागद्वारी की यात्रा करते हैं। आमतौर पर यह यात्रा बरसात के मौसम में ही होती है, जिसके कारण यात्रियों को गिरते पानी में यात्रा करनी पड़ती है। आम लोगों का मानना है कि यह यात्रा अमरनाथ जैसी कठिन यात्रा है। यह यात्रा पैदल ही होती है, यहां यात्रा के दौरान घोड़े, खच्चर आदि की सुविधा नहीं है। नागद्वारी की यात्रा में देनवा नदी और रास्ते में कई छोटे-छोटे नदी-नाले पड़ते हैं जिन्हें पार करना पड़ता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नालों और नदियों का कल-कल और पहाड़ों से गिरते झरने मन मोह लेते हैं। नागद्वारी की गुफा लगभग 35 फीट लंबी है। रास्ते में कजरी गांव पड़ता है जो चारों ओर से नदियों से घिरा और पहाड़ियों से ढका हुआ है। प्रशासन और ग्रामीणों ने यहां यात्रियों के रुकने के लिए वाटरप्रूफ टेंट लगाए जाते हैं, शौचालय की व्यवस्था और जगह-जगह डस्टबिन की व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र नागपुर के अनेकों सामाजिक संस्थाओं द्वारा नि:शुल्क भंडारा का आयोजन किया जाता है। किसी भी राज्य के यात्री को यात्रा के लिए पचमढ़ी तक पहुंचना ही होगा, क्योंकि यात्रा का मुख्य पड़ाव पचमढ़ी ही है। क्रमवार मार्ग में धूपगढ़, नागफनी गणेश टेकड़ी, कजारी, पश्चिम द्वार, पद्मशेष द्वार, अंबामाई यात्रा चिंतामन, चित्रशाला दुशधारा दमगढ़ के बाद अंतिम पड़ाव भजियागिरी माना जाता है।
क्विंदती के अनुसार नागराज का है ये क्षेत्र
क्विदंती के अनुसार, भस्मासुर को वरदान देने के बाद जब भस्मासुर वरदान की सत्यता की जांच के लिए भगवान शंकर के पीछे दौड़ा, तो उससे बचने के लिए भगवान शंकर ने नागराज को नागद्वारी में छोड़कर स्वयं चौरागढ़ गए। दूसरी कहानी के अनुसार, काजली ग्राम की महिला ने पुत्र प्राप्ति के लिए नागराज को काजल लगाने की मन्नत मांगी थी। पुत्र प्राप्ति के बाद वह काजल लगाने पहुंची, लेकिन नागराज का विशाल रूप देखकर वह मूर्छित हो गई और काजल नहीं लगा पाई। तब नागराज ने अपना छोटा रूप धारण किया, तब जाकर महिलाओं ने उन्हें काजल लगाया। यह यात्रा लगभग 100 वर्ष पहले से शुरू है, घने जंगल, ऊंची पहाड़ियों की चोटियों के बीच कल-कल करती नदियां और झरनों का आकर्षण आपके मन को मोह लेगा। यहां कई स्थानीय ग्रामीणों को अपने साथ गाइड के रूप में और अपना सामान ले जाने के लिए सशुल्क सेवा लेते हैं।

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