-वेयर हाउस खाली, लेकिन दूसरी जगह खरीदी केंद्रों को किया स्थानांतरित
अनोखा तीर, हरदा। पहले के समय में कृषि यंत्रों के अभाव में किसानों को खुद अपने खेतों में सीमित संसाधनों से पसीना बहाकर खेती करना पड़ती थी। अब उन्नत कृषि यंत्रों के कारण खेती करना तो आसान हुआ है, लेकिन फसल बेचने और खाद के लिए किसानों को अपना पसीना बहाना पड़ रहा है। किसानों ने पहले भोपाल तक जाकर मूंग खरीदी को लेकर लड़ाई लड़ी। अब वेयर हाउसों के सामने बरसात में कई दिनों तक सड़कों पर पड़े रहकर मूंग बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इस समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी में जितना फायदा किसानों को नहीं हो रहा है, उससे कहीं अधिक फायदा वेयर हाउस संचालकों, खरीदी कार्य कर रही समिति, सर्वेयर और इस खरीदी कार्य से जुड़ेे शासन-प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी अपने बारे न्यारे करने में लगे हुए हैं। अनोखा तीर द्वारा जब कई वेयर हाउस केंद्रों का निरीक्षण किया तो कई चौकाने वाले गड़बड़झाले सामने आए।
मंडी में खरीदी अटाला मूंग मिल रही अच्छी मूंग में
किसान जब मूंग का उत्पादन करता है तो उसकी ग्रेडिंग कर अच्छा माल तो समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए अपने यहां संग्रह कर रख लेता है और उस मूंग में से जो दाल और मिट्टी जैसा अटाला निकलता है उसे औने-पौने दामों पर मंडी में बेच देता है। मंडी में कुछ चुनिंदा व्यापारी उस माल पर गिद्द नजर रखते हुए सस्ते में खरीद लेते हैं। विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि हरदा मंडी से सैकड़ों क्विंटल मंूग का अटाला वेयर हाउसों में समर्थन मूल्य पर बिकने वाली मूंग में मिलाने के लिए पहुंचाया जा चुका है, जो किसानों द्वारा लाई गई अच्छी मूंग में मिलाया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर खरीदी कर रहे वेयर हाउस में खरीदी समिति द्वारा एक सिस्टम बनाया गया है। यहां कुछ वेयर हाउसों पर हाथ कांटे से तुलाई न कराते हुए सीधे प्लेट कांटा कराया जाता है और दिन भर अच्छा माल और अटाला माल को मिलाकर बोरियां भरावा दी जाती है। देखने वाली बात यह है कि प्रतिदिन जिले के आला अधिकारी मूंग खरीदी का निरीक्षण करने जा रहे हैं, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान देने की जरूरत ही नहीं समझी। विश्वस्त सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि कुछ वेयर हाउस अभी भराए ही नहीं हैं, लेकिन उन वेयर हाउसों को अटाला माल खपाने के लिए बंद कर दिया गया है और किसानों को जो चार-चार दिनों से उन वेयर हाउसों पर लाईन लगाकर खड़े थे उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित कर अटाला माल मिलाकर गुप्त तरीके से उन वेयर हाउसों पर खरीदी कार्य वर्तमान में भी चल रहा है। सूत्रों ने यहां तक बताया कि ऊपर से नीचे तक बोरों के हिसाब से कमीशन बंधा हुआ है। सबका अपना-अपना कमीशन है। सर्वेयर से शुरु होकर जिले के आला अधिकारियों तक यह कमीशन जा रहा है। किसानों को तो एफएक्यू मूंग की बात कर तौला नहीं जाता और बाद में किसानों के अच्छे माल में अटाला मिलाकर लाखों-करोंड़ों के बारे-न्यारे किए जा रहे हैं। वेयर हाउसो के निरीक्षण में एक बात ओर सामने आई है, बिना पैसे लिए किसी का भी मूंग नहीं तुलता। यदि आपका अच्छा माल है तो १०० रुपए बोरा तो देना ही पड़ेगा और यदि उसमें कुछ मिट्टी होती है तो ५०० से ८०० रुपए प्रति बोरा तक किसानो को राशि चुकाना पड़ रही है।





