-दक्षिण तट पर स्थित है यक्षराज कुबेर द्वारा स्थापित चमत्कारी रिद्धनाथ महादेव मंदिर
-पांच शताब्दी पुराना कछुए की आकृति वाला शिवालय
-श्रावण में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

बलवीर सिंह खत्री, हंडिया। पुण्य सलिला मां नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित प्राचीन रिद्धनाथ महादेव मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रावण मास में यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्षभर भी यहां तीर्थयात्रियों और नर्मदा परिक्रमा करने वालों का आना-जाना लगा रहता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका कछुए की आकृति जैसा स्वरूप है। दूर से देखने पर यह पूरा शिवालय कछुए के आकार का दिखाई देता है, जिसे समृद्धि और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण धन के देवता यक्षराज कुबेर ने कराया था। मंदिर के शिखर पर बने 12 बड़े गुंबद 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है।
18 तिलस्मी चमत्कारी पुतलियां करती हैं पहरेदारी
मंदिर के सभा मंडप में द्वारपाल स्वरूप स्थापित 18 प्राचीन प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार ये प्रतिमाएं भगवान शिव की आज्ञा से ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देती हैं। सभा मंडप के ऊपर विभिन्न मुद्राओं में देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो मंदिर की उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाती हैं।
नाभि कुंड का है विशेष धार्मिक महत्व
मंदिर के समीप स्थित मां नर्मदा का नाभि कुंड अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह नर्मदा नदी का मध्य बिंदु है और यहां स्नान करने से अनेक कष्ट एवं रोगों से मुक्ति मिलती है। नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल विशेष महत्व रखता है। अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक की नर्मदा परिक्रमा के दौरान बड़ी संख्या में यात्री यहां दर्शन और पूजन के लिए रुकते हैं।
पर्यटन की अपार संभावनाएं, सुविधाओं का अभाव
रिद्धनाथ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता, धार्मिक महत्व और अनूठी वास्तुकला के कारण पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां वर्षभर धार्मिक आयोजन होते हैं और देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल अपेक्षित विकास से वंचित है। क्षेत्र के लोगों ने कई बार हंडिया की प्राचीन नगरी को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई स्थायी पहल नहीं हो सकी है।





