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Wednesday, 21 October 2026
हरदा

पानी मांगने लगीं फसलें, मानसून की बेरुखी से किसानों की बढ़ी चिंता

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अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में मानसून की लंबी बेरुखी अब किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। आषाढ़ माह अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है, लेकिन 6 जुलाई के बाद से क्षेत्र में कहीं भी अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई। बीच-बीच में हुई रिमझिम फुहारों से वातावरण में ठंडक तो महसूस हुई, लेकिन खेतों की मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच सकी। इसके कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें अब पानी की कमी महसूस करने लगी हैं और किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। मसनगांव एवं आसपास के ग्राम गांगला, डोमनऊ, सालाबेड़ी, कांकरिया, खमलाय और हरपालिया में किसानों ने समय पर सोयाबीन, मक्का, उड़द एवं धान की बुवाई कर दी थी। शुरुआती बारिश से फसलों का अंकुरण भी अच्छा हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून कमजोर पड़ गया। पिछले लगभग तीन सप्ताह से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण खेतों की मिट्टी सूखने लगी है। दोपहर की तेज धूप और उमस से नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। कई स्थानों पर सोयाबीन की पत्तियां मुरझाने लगी हैं, जबकि मक्का की फसल भी पर्याप्त नमी के अभाव में कमजोर दिखाई दे रही है। किसान मयूर भायरे एवं नितेश पाटिल ने बताया कि इस समय फसलों को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो पौधों की वृद्धि रुक सकती है और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे ट्यूबवेल और पंपों के माध्यम से फसलों को बचाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं। ऐसे किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। क्षेत्र के तालाब, छोटे जलाशय और नाले भी अभी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। भूजल स्तर में भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। लगातार बारिश नहीं होने से कुओं और ट्यूबवेलों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद भी अधूरी रह गई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। सुबह और शाम बादल तो दिखाई देते हैं, लेकिन बिना बारिश किए ही आगे बढ़ जाते हैं। कई बार हल्की बूंदाबांदी होती है, जो केवल पौधों की पत्तियों तक ही सीमित रह जाती है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं पहुंचने से किसानों की उम्मीदें हर दिन कमजोर होती जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की वर्तमान अवस्था में लगातार और अच्छी वर्षा बेहद आवश्यक है। यदि जल्द ही मानसून सक्रिय होकर पर्याप्त बारिश नहीं करता है तो सोयाबीन, मक्का एवं अन्य खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसानों को फिलहाल खेतों की लगातार निगरानी करने तथा जहां संभव हो, हल्की सिंचाई की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों और किसानों को अब केवल अच्छी बारिश का इंतजार है। उनका मानना है कि यदि आगामी सप्ताह में मानसून सक्रिय होकर अच्छी बारिश करता है तो फसलों को नया जीवन मिल सकता है और खेतों में फिर से हरियाली लौट आएगी। वहीं मौसम की बेरुखी जारी रही तो किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिरने का खतरा बना रहेगा।

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