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Thursday, 22 October 2026
हरदा

भगवान श्री जगन्नाथ का रथ खींचने उमड़ा श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब

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-हरिनाम संकीर्तन, पुष्पवर्षा और जय श्री जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा हरदा
-हजारों श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शंन
अनोखा तीर, हरदा। अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) हरदा द्वारा रविवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा महारानी की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ निकाली गई। भगवान श्री जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए हजारों श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे नगर में जय श्री जगन्नाथ एवं हरे कृष्ण-हरे राम के जयघोष गूंजते रहे, जिससे हरदा पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। रथ यात्रा दोपहर 2 बजे गुर्जर बोर्डिंग से प्रारंभ हुई। भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा महारानी आकर्षक एवं पारंपरिक स्वरूप से सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। भक्तों ने रथ के आगे झाड़ू लगाई यात्रा चैतन्य नेत्रालय, सनफ्लावर स्कूल, श्री परशुराम चौक, चांडक चौराहा होते हुए गुप्तेश्वर मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य दर्शन किए। रथ की रस्सी थामने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में भगवान का रथ खींचते हुए हरिनाम संकीर्तन पर नृत्य करते रहे। पूरे मार्ग में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा भगवान का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया तथा जगह-जगह आरती उतारी गई। नगर के प्रमुख मार्गों पर भक्ति, उल्लास और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। यात्रा के दौरान हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन एवं भक्ति नृत्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ हरे कृष्ण-हरे राम का संकीर्तन करते हुए भगवान के रथ के साथ चलते रहे। पूरे मार्ग में भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई।
हेमंत मोराने ने बताया कि रथ यात्रा के समापन के पश्चात शाम के समय गुप्तेश्वर मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा महारानी का दिव्य एवं मनमोहक श्रंगार किया गया तथा भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। इसके पश्चात इंदौर से पधारे पूज्य श्रीमान राधाजीवनदास प्रभु गुरुदेव एवं आसाम से पधारे पूज्य लाडलीलाड़दास प्रभु ने भक्तिमय एवं ज्ञानवर्धक प्रवचन दिए। अपने प्रवचनों में दोनों संतों ने भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा, रथ यात्रा के आध्यात्मिक महत्व तथा सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान का रथ खींचना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति समर्पण, सेवा और भक्ति का प्रतीक है। रथ की रस्सी पकड़कर उसे खींचने से भक्त स्वयं को भगवान की सेवा से जुड़ा हुआ अनुभव करता है तथा इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है। यह भगवान के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। छप्पन प्रकार के व्यंजन अर्पित कर भक्त भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं, जिसके पश्चात वही प्रसाद भक्तों में महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। दोनों संतों ने श्रद्धालुओं से नियमित हरिनाम संकीर्तन, श्रीकृष्ण भक्ति, सत्संग एवं सनातन संस्कृति के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में भव्य महाआरती संपन्न हुई तथा सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। इस्कॉन हरदा के हेमांग निमाई प्रभु जी ने रथ यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगरवासियों, सभी सेवकों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा से यह आयोजन अत्यंत भव्य, शांतिपूर्ण एवं ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। रथ यात्रा में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर सेवा देकर आयोजन को सफल बनाया। रविवार को निकली इस भव्य रथ यात्रा ने हरदा को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। पूरे नगर में देर शाम तक भक्ति, उत्साह और आस्था का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने इसे हरदा की सबसे भव्य एवं यादगार श्री जगन्नाथ रथ यात्राओं में से एक बताया।

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