-स्टाम्प वेंडर के वारिसों को वापस करना होगा 2.87 लाख रुपये
अनोखा तीर, हरदा। हरदा में वार्ड क्र.25, गली नंबर 1 निवासी नर्मदाप्रसाद पिता मोहनलाल गौर ने स्टाम्प वेंडर राकेश अग्रवाल को अपने प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए 2.87 लाख रुपये का भुगतान किया था, लेकिन प्लॉट की रजिस्ट्री होने से पूर्व ही उनकी मृत्यु हो गई तथा परिजनों ने राशि वापस करने से मना कर दिया। अब उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद राकेश अग्रवाल की पत्नी रीना अग्रवाल एवं पुत्र लक्ष्य अग्रवाल को नर्मदाप्रसाद गौर को 2.87 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश जे.पी. सिंह एवं सदस्य अंजलि जैन द्वारा दिया गया। एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि इस प्रकरण का निराकरण आयोग द्वारा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत किया गया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि बिना वसीयत के मृत्यु होने पर जहां पक्षकार हिन्दू हैं, वहां हिन्दू उत्तराधिकार के नियम लागू होते हैं। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत किसी मृतक की चल-अचल संपत्ति यदि निर्वसीयत है और सहदायिकी निर्मित नहीं है तो हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 से 12 के प्रावधानों तथा अनुसूची के अनुसार उत्तराधिकार का निर्धारण किया जाएगा। आयोग ने कहा कि विरोधी पक्षकार क्रमांक-2 एवं 3 मृतक राकेश अग्रवाल के पुत्र एवं पत्नी हैं, जो अनुसूची वर्ग-1 के वारिस हैं, जबकि विरोधी पक्षकार क्रमांक-1 बसंत अग्रवाल मृतक का पिता है, जो अनुसूची वर्ग-1 का वारिस नहीं होकर वर्ग-2 का वारिस है। अनुसूची वर्ग-1 के वारिस समान अंश में उत्तराधिकार प्राप्त करते हैं तथा वर्ग-1 के उत्तराधिकारी होने पर वर्ग-2 के वारिसों को प्राथमिकता नहीं मिलती। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 10 के अनुसार विधवा को एक अंश तथा पुत्र और पुत्री को एक-एक अंश प्राप्त होता है। आयोग ने अपने आदेश में रीना अग्रवाल एवं लक्ष्य अग्रवाल को नर्मदाप्रसाद गौर द्वारा प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए राकेश अग्रवाल को दी गई 2.87 लाख रुपये की राशि वापस लौटाने का जिम्मेदार माना है। साथ ही रीना अग्रवाल एवं लक्ष्य अग्रवाल को राकेश अग्रवाल की संपत्ति का विधिक वारिस माना है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता आयोग हरदा का आदेश

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