-बिखरता परिवार फिर से बसा: वन स्टॉप सेंटर की पहल से पति-पत्नी के बीच सुलझा विवाद
अनोखा तीर, हरदा। श्रीमती अपेक्षा एवं उनके पति मयंक (दोनों परिवर्तित नाम) के विवाह को कुछ वर्ष बीत चुके थे। शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे आपसी तालमेल की कमी और गलतफहमियों के कारण दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा। प्रतिदिन के क्लेश से तंग आकर तथा अपने मासूम बेटे आरव के भविष्य की चिंता को देखते हुए अपेक्षा ने सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर, हरदा में आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन स्टॉप सेंटर, हरदा द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई और पति मयंक को काउंसलिंग के लिए बुलाया। दोनों पक्षों में कड़वाहट अधिक होने के कारण समस्या के समाधान हेतु तीन संयुक्त काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए। शुरुआती बैठकों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, लेकिन केस वर्कर ने बेहद धैर्य के साथ दोनों की बातें सुनीं और उन्हें परिवार व वैवाहिक रिश्ते का महत्व समझाया। 26 अप्रैल 6 को आयोजित अंतिम काउंसलिंग में समझाइश का गहरा असर देखने को मिला। दोनों ने अपनी जिद छोड़कर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए पुरानी बातें भूलकर साथ रहने का फैसला किया। मयंक ने केंद्र के अधिकारियों के समक्ष संकल्प लिया कि वह पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएगा और परिवार की पूरी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएगा। इसके बाद अपेक्षा स्वेच्छा और पूरे आत्मसम्मान के साथ पति व बेटे के साथ अपने घर रवाना हो गई। वर्तमान में उनके बीच का हर विवाद समाप्त हो चूका है और खुशी-खुशी परिवार के साथ निवासरत है। इस प्रकार वन स्टॉप सेंटर हरदा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि सही समय पर सही मार्गदर्शन मिले, तो टूटते हुए परिवारों को बचाया जा सकता है। सेंटर की संवेदनशील पहल और निरंतर प्रयासों से एक बिखरता परिवार न केवल टूटने से बच गया, बल्कि एक मासूम बच्चे को फिर से माता-पिता का संयुक्त प्यार और सुरक्षित भविष्य मिल गया। वन स्टॉप सेंटर की इस सफलता से परिवार में दोबारा खुशियां लौट आई हैं।
सफलता की कहानी

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