अनोखा तीर, हरदा। संस्कृत भारती नर्मदापुरम विभाग के अंतर्गत हरदा जिले की वृहद बैठक रविवार को किसान भवन में आयोजित हुई। बैठक का उद्देश्य संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जन तक इसके प्रचार-प्रसार की कार्ययोजना तैयार करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं ध्येय मंत्र के साथ हुआ। जनपद मंत्री हेमलता अग्रवाल ने बताया कि बैठक में संस्कृत भारती नर्मदापुरम विभाग के विभाग संयोजक सुधांशु शेखर मिश्र एवं नर्मदापुरम जिला मंत्री अरुण दुबे का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस दौरान संस्कृत संभाषण शिविर, पत्राचार पाठ्यक्रम, साप्ताहिक मेलनम्, बाल केंद्र, गीता शिक्षण केंद्र एवं संस्कृत सप्ताह सहित विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई तथा आगामी संस्कृत संभाषण शिविर के स्वरूप पर चर्चा की गई। जिला अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता संस्कृत के प्रति बढ़ते उत्साह का परिचायक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के प्रमुख ओमनारायण शुक्ला ने की, जबकि रामनिवास छलोत्रे अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन हेमलता अग्रवाल ने किया। व्यवस्थाओं में उमेश शर्मा एवं बृजमोहन पारे का विशेष सहयोग रहा। मुख्य अतिथि सुधांशु शेखर मिश्र ने संस्कृत भारती के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्था देशभर में संभाषण वर्ग, पत्राचार पाठ्यक्रम, बाल केंद्र, प्रशिक्षण वर्ग, प्रबोधन वर्ग तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रही है। उन्होंने सभी संस्कृत अनुरागियों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि अरुण दुबे ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। उन्होंने आगामी जनगणना में भाषा चयन के समय संस्कृत को भी स्थान देने की अपील की। उन्होंने संस्कृत संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। हेमलता अग्रवाल ने बताया कि हरदा में संस्कृत सीखने के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए शीघ्र ही नियमित संस्कृत संभाषण कक्षाएं प्रारंभ की जाएंगी। बैठक में निलेश सोनी, प्रवीण काशीव, शैलेंद्र साबू, संजय वर्मा, हरिओम महागाय, पुरुषोत्तम चौहान, योगेश शर्मा, बृजमोहन पारे सहित बड़ी संख्या में संस्कृत अनुरागी, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी ने संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार का सामूहिक संकल्प लिया।
संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ संस्कृत भारती की वृहद बैठक संपन्न

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