-तेल और सब्जियों की महंगाई से बिगड़ा रसोई का बजट
अनोखा तीर, मसनगांव। लगातार बढ़ रही महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले चार महीनों में शक्कर, खाद्य तेल, प्याज और हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं महंगी होने से गृहणियों के लिए घरेलू बजट का संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय बाजार में शक्कर का थोक भाव चार माह पहले करीब 4200 रुपये प्रति क्विंटल था, जो बढ़कर 4800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। वहीं फुटकर बाजार में शक्कर का भाव 42 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 48 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। खाद्य तेलों के दामों में भी पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रति लीटर 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे रसोई का खर्च और बढ़ गया है। सब्जी बाजार में भी महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। भिंडी, गिलकी और लौकी जैसी सामान्य हरी सब्जियां 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं, जबकि टमाटर के दाम 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। प्याज की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है, जिससे आम लोगों की रसोई प्रभावित हो रही है। ग्रामीण राधेश्याम लुहार और छोटेलाल सुतार ने बताया कि चार महीनों में शक्कर करीब 6 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। खाद्य तेल और सब्जियों के बढ़े दामों ने घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। पहले जहां एक निश्चित राशि में महीनेभर का राशन आ जाता था, वहीं अब उसी सामान के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। मजदूर वर्ग को परिवार का खर्च चलाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। गृहणियों का कहना है कि महंगाई के कारण अब रसोई में कटौती करनी पड़ रही है। पहले जहां रोजाना हरी सब्जियां बनती थीं, वहीं अब सप्ताह में सीमित दिनों तक ही सब्जियां खरीदी जा रही हैं। कई परिवारों ने तेल और शक्कर का उपयोग भी कम कर दिया है ताकि मासिक खर्च नियंत्रित रखा जा सके। क्षेत्र के लोगों ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
चार माह में शक्कर 42 से 48 रुपये किलो हुई

0 Views



