अनोखा तीर, हरदा। भारत में वर्तमान कार्बन उत्सर्जन को बेअसर करने के लिए अरबों पेड़ लगाना आवश्यक है। इसकी भरपाई के लिए अनुमानित प्रति व्यक्ति 200 पेड़ों की आवश्यकता है। इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती वृक्षारोपण के लिए भूमि की उपलब्धता है। बड़ी मात्रा में पेड़ लगाने के लिए ऐसी भूमि की जरूरत होती है, जो कृषि योग्य भूमि, नगरीकरण और अन्य आवश्यकताओं में बाधा न बने। इसी दिशा में पर्यावरणविद गौरीशंकर मुकाती अपनी परियोजना के अंतर्गत रूपाई एग्रिफॉरेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस परियोजना के तहत अब तक 2 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। इस मॉडल की विशेषता यह है कि एक इंच भी भूमि का स्वरूप बदले बिना व्यवहारिक रूप से करोड़ों पौधे लगाए जा सकते हैं। इस परियोजना मॉडल से प्रभावित होकर देश-विदेश से शोधार्थी अध्ययन के लिए हरदा पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में राजीव गांधी कंटेम्पररी रिसर्च इंस्टीट्यूट, दिल्ली के हेड रिसर्चर डॉ. जीत सिंह एवं एमडी विजय महाजन अध्ययन के लिए हरदा आए। गौरीशंकर मुकाती ने बताया कि उनका कार्बन मॉडल 250 वर्षों तक कार्बन को लॉक रख सकता है, जबकि वर्तमान में विश्व स्तर पर 40 से 50 वर्षों तक कार्बन लॉक रखने की परिकल्पना है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस मॉडल को अन्य शासकीय योजनाओं की तरह दूरगामी, कृषि एवं कृषकों, पर्यावरण तथा सतत जीवन शैली के विकास के लिए अपना सकती है। सरकार यदि इस योजना को बाँस मिशन जैसी योजनाओं की तर्ज पर लागू करे तो वर्तमान के साथ-साथ दूरगामी सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
वृक्षारोपण हेतु भूमि की उपलब्धता की चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता हरदा मॉडल

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