अनोखा तीर, हरदा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की पंडवानी कला विरासत को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित करने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका तीजनबाई के निधन पर नगर की विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1983 में भारत भवन में पहली प्रस्तुति के बाद तीजनबाई को अपनी कला प्रतिभा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायन शैली राष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित हुई। उनकी कला प्रतिभा के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित साहित्यकारों एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि तीजनबाई का निधन लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी कला और योगदान सदैव स्मरणीय रहेंगे। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में वनमाली सृजन केंद्र की ओर से उमेश शर्मा, संभावना विचार मंच की ओर से ज्ञानेश चौबे, हैप्पी हरदा की ओर से रामशंकर मुकाती, सुनील बागरे, हरिमोहन शर्मा तथा अधिवक्ता अजय गिनारे शामिल रहे।
लोकगायिका तीजनबाई के निधन पर दी श्रद्धांजलि

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