-सोयाबीन सहित अन्य फसलों का अंकुरण शुरू
अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश के साथ ही खरीफ सीजन की खेती ने गति पकड़ ली है। किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई का कार्य पूरा करते हुए लगभग 90 प्रतिशत रकबे में खरीफ फसलों की बोनी कर दी है। इस वर्ष क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन, मक्का, धान, उड़द एवं चिया सीड्स की बुवाई की गई है। बुवाई पूरी होने के बाद अब किसानों की निगाहें अच्छी और नियमित बारिश पर टिकी हैं, ताकि फसलों का अंकुरण एवं प्रारंभिक विकास बेहतर हो सके। शनिवार शाम करीब पांच बजे क्षेत्र में लगभग आधे घंटे तक हुई बारिश से किसानों को कुछ राहत अवश्य मिली, लेकिन फसलों की आवश्यकता के अनुसार अभी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेतों में नमी बनी रहेगी और फसलों की बढ़वार अच्छी होगी। बारिश में अधिक देरी होने पर अंकुरण और फसल विकास प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। क्षेत्र के किसान पवन पाटिल, दिनेश छलोत्रे एवं नवीन भायरे ने बताया कि मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण इस वर्ष बुवाई का कार्य सामान्य से करीब 10 से 12 दिन देरी से शुरू हुआ। इसके बावजूद पहली अच्छी बारिश मिलते ही किसानों ने दिन-रात मेहनत कर अधिकांश खेतों में बुवाई पूरी कर ली। उनका कहना है कि जून माह में ही अधिकांश रकबे में बोनी पूरी हो जाना किसानों के लिए राहत की बात है। अब समय पर अच्छी बारिश होने पर फसल उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। सोयाबीन की बुवाई करने वाले किसानों ने खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए निंदानाशक दवाओं का छिड़काव भी शुरू कर दिया है। कृषि जानकारों का मानना है कि खरीफ फसलों के लिए शुरुआती दिनों में लगातार और संतुलित वर्षा बेहद आवश्यक होती है। यदि आने वाले सप्ताह में मानसून सक्रिय रहता है तो फसलों की बढ़वार अच्छी होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। फिलहाल क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद अब समय पर होने वाली अच्छी बारिश पर टिकी हुई है।
गरज-चमक के साथ हुई बारिश
क्षेत्र में पिछले दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। शुक्रवार दोपहर को हल्की बारिश के बाद मौसम साफ बना रहा, जबकि शनिवार को दोपहर बाद बादल छाने के बाद शाम करीब पांच बजे गरज-चमक के साथ लगभग 20 मिनट तक बारिश हुई। हालांकि बारिश के बावजूद उमस और गर्मी बनी रही। किसान गौरव भायरे ने बताया कि कम बारिश होने से खेतों में बोई गई फसलों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है, इसलिए अच्छी बारिश होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक कम वर्षा होने के कारण नदी-नालों में पर्याप्त पानी नहीं आ पाया है, जिससे खेतों की नमी भी जल्दी समाप्त हो रही है। अच्छी बारिश से जहां फसलों को लाभ मिलेगा, वहीं नदी-नालों में पानी भरने से वन्य प्राणियों के लिए पेयजल उपलब्ध होगा तथा किसानों को फसलों में दवाइयों के छिड़काव के लिए भी पानी की सुविधा मिल सकेगी।





