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Thursday, 22 October 2026
हरदा

जिले में भारी वाहनों की फिटनेस जांच सुविधा बंद

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-वाहन मालिक दूसरे जिलों के चक्कर लगाने को मजबूर

अनोखा तीर, मसनगांव। हरदा जिले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) होने के बावजूद भारी एवं व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से वाहन मालिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले लगभग छह माह से जिले में फिटनेस परीक्षण बंद होने के कारण वाहन मालिकों को अपने ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच कराने के लिए इंदौर, खंडवा, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), देवास सहित अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है। वाहन मालिक चंदू साकल्ले ने बताया कि पहले हरदा आरटीओ कार्यालय में ही वाहनों की फिटनेस जांच हो जाती थी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती थी। लेकिन अब सुविधा बंद होने से एक फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पूरा दिन खराब होने के साथ अतिरिक्त डीजल, टोल टैक्स और अन्य खर्च भी वहन करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच चरणबद्ध तरीके से ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से कराई जा रही है। कई स्थानों पर पुराने मैनुअल फिटनेस परीक्षण बंद किए गए हैं, जिसके कारण जिन जिलों में एटीएस उपलब्ध नहीं है, वहां के वाहन मालिकों को दूसरे जिलों में जाना पड़ रहा है। वाहन संचालकों का कहना है कि दूसरे जिलों तक वाहन ले जाने में समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ रहे हैं। कई बार फिटनेस के लिए लंबी प्रतीक्षा भी करनी पड़ती है, जिससे व्यावसायिक कार्य प्रभावित होते हैं और वाहनों के संचालन में देरी होती है। वाहन मालिकों ने मांग की है कि हरदा जिले में भी शीघ्र ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया जाए अथवा आरटीओ कार्यालय में पुन: फिटनेस जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि जिले के सैकड़ों वाहन मालिकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। आरटीओ राकेश कुमार अहाके ने बताया कि मैनुअल सिस्टम बंद होने के बाद अब एटीएस प्रणाली के माध्यम से ही फिटनेस जांच की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए निजी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हरदा जिले के लिए अभी किसी कंपनी ने कार्य नहीं लिया है, जिसके कारण वाहन मालिकों को अन्य शहरों में जाकर फिटनेस संबंधी कार्य कराना पड़ रहा है।

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