शासकीय कार्यालयों में मितव्ययता बरतने के निर्देश

-आमजन के लिए भी चलेगा जागरुकता अभियान
अनोखा तीर, हरदा। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के दृष्टिगत प्रधानमंत्री के आह्वान पर राज्य शासन ने शासकीय कार्यालयों में मितव्ययता बरतने तथा आमजन के बीच जन-जागरूकता अभियान चलाने के लिए विभाग प्रमुखों एवं कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों में कहा गया है कि अनावश्यक यात्रा और व्यय में कमी लाने के लिए विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं सेमिनारों का आयोजन यथासंभव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अथवा हाइब्रिड माध्यम से किया जाए। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। भारसाधक सचिव अपने अधीनस्थ अधिकारियों की प्रदेश के बाहर की यात्राएं केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही स्वीकृत करेंगे। भारसाधक सचिव की प्रदेश के बाहर की शासकीय यात्राएं पूर्व व्यवस्था के अनुसार मुख्य सचिव के अनुमोदन के बाद ही स्वीकृत होंगी। निर्देशों में कृषि, उद्यानिकी एवं संबद्ध विभागों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए अभियान चलाने को कहा गया है। वहीं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को पाइप्ड नेचुरल गैस लाइन के विस्तार तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एवं एलपीजी उपभोक्ताओं के डुप्लीकेट एवं अपात्र कनेक्शनों की पहचान कर उनके निराकरण के लिए अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण विभागों को पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग एवं उसके प्रचार-प्रसार पर बल देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सभी विभागों को पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर स्थापना को बढ़ावा देने तथा विद्युत के उचित उपयोग के लिए जागरूकता फैलाने के लिए कहा गया है। जनसंपर्क विभाग को ‘मेरा भारत-मेरा योगदानÓ अभियान के माध्यम से नागरिकों को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटन विभाग को ‘देखो अपना देशÓ अभियान के तहत मध्यप्रदेश से जुड़े प्रवासी भारतीयों को प्रदेश में पर्यटन एवं अवकाश बिताने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। वहीं खनिज साधन विभाग को लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ, कॉपर एवं कोयला जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की अनुज्ञाएं एवं लीज स्वीकृति की कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

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