-नर्मदा तट पर बनेगा देश का अनोखा रेलवे स्टेशन
-महाकाल, ओंकारेश्वर और त्रयंबकेश्वर को जोड़ेगा नया रेल नेटवर्क
-ओंकारेश्वर में आकार ले रहा आस्था और आधुनिकता का संगम
-मंदिर की तर्ज पर बन रहा भव्य रेलवे स्टेशन
इन्ट्रों : आजादी के 70 साल बाद भी खरगोन रेल नेटवर्क से कटा रहा और जनप्रतिनिधियों ने इसे सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाकर रखा। लेकिन पिछले एक दशक से शहरवासियों की मुहिम रंग लाई है। केंद्र से दो रेल परियोजनाएं मंजूर हुईं, एक का सर्वे पूरा हो चुका है और दूसरी तेजी से आगे बढ़ रही है। 2035 तक खरगोन के बड़े रेल नेटवर्क से जुड़ने की उम्मीद है। इससे पहले सनावद का ओंकारेश्वर रोड स्टेशन सिंहस्थ 2028 के लिए तैयार हो रहा है। इस स्टेशन से खरगोन को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे व्यापार को रफ्तार और धार्मिक आस्था को नई दिशा मिलेगी। खरगोनवासियों के लिए यह खुशी की बात है।
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अनोखा तीर, खरगोन/खंडवा। हर-हर नर्मदे के जयकारों के साथ जल्द ही घंटी बजेगी और इंजन की सीटी सुनाई देगी। डेढ़ सौ साल पुराने अंग्रेजों के जमाने के मीटरगेज स्टेशन को अलविदा कहकर मां नर्मदा के तट पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की प्रतिकृति जैसा भव्य रेलवे स्टेशन अब अंतिम चरण में है। रतलाम मंडल का यह पहला ऐसा स्टेशन होगा, जहां यात्री सब-वे से प्लेटफॉर्म तक पहुंचेंगे। दो मंजिला स्टेशन भवन का शिखर देखते ही श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर मंदिर की अनुभूति होगी। मोरटक्का के पास इंदौर-खंडवा फोरलेन का ट्रैफिक अब 90 प्रतिशत बन चुके अंडरपास से गुजरेगा, जिससे जाम से मुक्ति मिलेगी। 560 मीटर लंबे स्टेशन पर तीन लाइनें और दो हाई-लेवल प्लेटफॉर्म श्रद्धालुओं का स्वागत करने को तैयार हैं।
130 किमी की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन, ट्रायल सफल
सनावद से ओंकारेश्वर रोड के बीच 5.4 किमी ट्रैक पर 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन का सफल स्पीड ट्रायल हो चुका है। यानी पटरियां तैयार हैं, बस हरी झंडी का इंतजार है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सीआरएस निरीक्षण पूरा होते ही खंडवा-सनावद मेमू को ओंकारेश्वर तक बढ़ा दिया जाएगा।
सिंहस्थ 2028 : तीन ज्योतिर्लिंग एक सूत्र में
यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक स्टेशन नहीं, बल्कि सिंहस्थ 2028 के महासंकल्प की नींव है। इसके पूरा होते ही महाकालेश्वर उज्जैन, ओंकारेश्वर और र्त्यंबकेश्वर नासिक – तीनों ज्योतिर्लिंग एक रेल सूत्र में बंध जाएंगे। नासिक से काशी विश्वनाथ तक का सफर अब आस्था एक्सप्रेस से आसान होगा। इंदौर से ओंकारेश्वर पहुंचने में अभी सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे लगते हैं। ट्रेन शुरू होते ही समय और थकान दोनों बचेंगे। प्रयागराज, चित्रकूट, काशी, शिरडी और ओंकारेश्वर एक रेल लाइन से जुड़ेंगे। महेश्वर, मांडू, पातालपानी तथा अजंता-एलोरा की गुफाएं भी रेल नक्शे पर आ जाएंगी।
इतिहास से भविष्य तक का सफर
1872 में जब अंग्रेजों ने नर्मदा पर लोहे का पुल और मीटरगेज लाइन बनाई थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन इसी स्थान पर मंदिर जैसा स्टेशन बनेगा। पुराना जर्जर स्टेशन तोड़ दिया गया है और उसकी जगह दो किमी दूर मोरघड़ी में नया इतिहास लिखा जा रहा है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, यह सिर्फ स्टील और सीमेंट नहीं, श्रद्धा की पटरियां हैं। जब पहली ट्रेन यहां रुकेगी, तो सिर्फ यात्री नहीं, नर्मदा मैया की लहरें भी उसका स्वागत करेंगी।

