-जाम्भाणी संस्कार शिविर में योग, संस्कार और नशा मुक्ति पर दी गई जानकारी
अनोखा तीर, हरदा। जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर के तत्वावधान में श्रीविश्नोई संत आश्रम नेमावर में पांच दिवसीय जाम्भाणी संस्कार शिविर संचालित किया जा रहा है। शिविर के चौथे दिवस में शिविरार्थी किशोर बालकों ने जीवन उपयोगी महत्वपूर्ण बातें सीखीं। शिविर शिक्षक अमृतलाल पूनिया ने योग अभ्यास कराते हुए योग और प्राणायाम का जीवन में महत्व बताया। राजस्थान से आए जाम्भाणी साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि हरिराम खीचड़ ने विश्नोई पंथ के लिए उल्लेखित 29 नियमों में से 21 से 29 तक के नियमों की व्याख्या कर बच्चों को समझाया तथा उन्हें जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने भी इन नियमों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। उमंग स्वास्थ्य केंद्र के परामर्शदाता एवं सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर विश्नोई ने किशोर बच्चों को किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन, पोषण आहार, मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। साथ ही उमंग हेल्पलाइन और टेली मानस हेल्पलाइन नंबर की जानकारी भी साझा की। नेमीचंद बेनीवाल ने जाम्भाणी साहित्य के संदेश और गुरु जंभेश्वर भगवान के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए उनके उपदेशों की जानकारी दी। शिविर संयोजक स्वामी आत्मानंद महाराज के मार्गदर्शन में शिविर प्रभारी कैलाश गोदारा, सह प्रभारी उमेश बेनीवाल, संगठन सचिव पूनमचंद पवार, कैलाश आंजना, दिनेश सारन, मनमोहन पवार, राजेंद्र भादू, रामसुख बेनीवाल, डॉ. इन्द्रपाल जाणी, पूनमचंद जाणी, किशन खिलेरी, अधिवक्ता आरडी झूरिया एवं विनोद गोदारा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज होगा समापन अकादमी सचिव पूनमचंद पवार ने बताया कि जाम्भाणी संस्कार शिविर का समापन शुक्रवार को होगा। मां नर्मदा के सिद्धक्षेत्र स्थित श्रीविश्नोई संत आश्रम में आयोजित इस शिविर में बच्चों ने पूरे मन से संस्कार, योग और समाजसेवा की भावना जागृत करने का अभ्यास किया। बच्चों ने अनुशासन के साथ शिविर की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। समापन अवसर पर परीक्षा परिणाम घोषित कर विजेता बच्चों का उत्साहवर्धन किया जाएगा।
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