अनोखा तीर, हरदा। अपने चालीस वर्षों के पत्रकारिता कार्य में वैसे तो अनेकानेक चर्चित लोगों के साक्षात्कार तथा भेंटवार्ता की खबरें छापी है। लेकिन आज जिसके लिए लिख रहा हूं वह कोई नेता, अभिनेता, कलाकार, उच्च पदों पर पदस्थ अधिकारी नहीं बल्कि एक नन्ही सी परी मेरी पौती पाविका शर्मा है। जी हां, पविका अभी पहली क्लास में प्रवेश कर रही है। आज उसने अनायास ही मेरे समक्ष इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि दादू मुझे कलेक्टर से मिलना है। अचानक एक छोटी सी बिटिया जो वास्तव में कलेक्टर क्या होता है शायद यह भी नहीं जाती होगी और उसके द्वारा यह कहना मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। मैंने पूछा बेटा आपको कलेक्टर साहब से क्यों मिलना है? कोई काम है क्या? वह बोली अभी तो मैं उनको पहचानती भी नहीं फिर काम क्या बोलूंगी। मुझे तो उन्हें देखना है। मैंने पूछा आपको किस लिए देखना है, देखकर क्या करोगी? अरे बुद्धु दादू मैं भी तो बड़ी होकर कलेक्टर बनूंगी ना, इस लिए तो देखना पड़ेगा। अच्छा, क्या देखोगी? यही कि वह कैसे बैठते हैं, कैसे चलते हैं। काम कैसे करते हैं। देखूंगी तभी तो सीखूंगी। उसकी बाल जिज्ञासा को पूरा करने के लिए मैंने भी तत्काल हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को फोन लगाया और भेंट करने हेतु समय लिया। जब उसे लेकर मैं कलेक्टर कार्यालय पहुंचा तो उसने अलग-अलग कक्षों में कार्यरत अधिकारी कर्मचारियों के बारे में भी पूछा कि यह लोग यहां क्या करते हैं। फिर भेंट हुई कलेक्टर सिद्धार्थ जैन जी से। कलेक्टर श्री जैन ने भी पूरी आत्मिकता से चर्चा करते हुए पहले नाम, फिर स्कूल का नाम आदि औपचारिक बातें की। जब पाविका ने कहा कि मैं भी कलेक्टर बनूंगी, मैं छोटी थी तब से ही यह सोच रही हूं। तब श्री जैन ने कहा कि अच्छा, बहुत बढ़िया, अब आप बड़ी हो गई हो क्या। इसके लिए तो बहुत पढ़ाई करना पड़ेगा। आप खेलने के साथ पढ़ाई भी करते रहोगी तो कलेक्टर बन जाओगी। इस तरह बच्ची का उत्साहवर्धन करते हुए वार्तालाप हुआ।

तत्पश्चात मैंने उसकी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार मिश्रा से भी भेंट कराई। फिर सोचा क्यों ना इस भेंट वार्ता की खबर भी बनाई जाएं। बिटिया के भाग्य की लकीरें तो हम नहीं पढ़ सकते, लेकिन जब वह बड़ी होगी तो आज की यह भेंट वार्ता की खबर जरूर उसके लिए एक प्रेरणाश्रोत तथा यादगार धरोहर साबित होगी।

