-भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नल-जल योजना, दूषित पानी से जी रहे नारकीय जीवन
इंट्रो : स्वर्णिम मध्यप्रदेश के वाशिंदों को जब शुद्ध पानी ही नसीब न हो पाए तो इसे क्या कहा जाएगा? सरकारें योजनाएं तो बहुत बनाती हैं, लेकिन धरातल पर उन योजनाओं का क्या क्रियान्वयन हुआ है। इसकी तस्वीर यदि देखना है तो टिमरनी विकासखंड के वनग्राम कुमरुम में जाकर देखी जा सकती है। यहां के ग्रामीण गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सरकार ने लाखों रुपए लगाकर नल-जल योजना के तहत नल तो लगा दिए, लेकिन उनमें एक बूंद भी पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई। पूरी नल-जल योजना घटिया निर्माण के कारण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। गांव में नलकूप खुदाई के तहत शासन के लाखों रुपए खर्च कर जगह-जगह बोरिंग करने का दिखावा किया गया। जिसके कारण ग्रामीणों को जल नसीब नहीं हो पाया। अब ग्रामीण रसातल में पहुंच चुके कुएं के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
अनोखा तीर, हरदा। भीषण गर्मी के चलते टिमरनी विकासखंड के वनग्राम कुमरूम में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि ग्रामीण कुएं के गंदे और मटमैले पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। दूषित पानी के उपयोग से गांव में बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। पिछले दो माह से ग्रामीण पानी की समस्या से परेशान हैं। विकासखंड टिमरनी की ग्राम पंचायत कायदा अंतर्गत आने वाले वनग्राम कुमरूम में बूंद-बूंद पानी के लिए लोग भटक रहे हैं। गांव की महिलाओं को पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है और कुएं में जमा गंदे पानी का उपयोग ही पीने एवं घरेलू कार्यों के लिए किया जा रहा है। इससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण राजू ने बताया कि गांव में नल-जल योजना होने के बावजूद गर्मी शुरू होते ही पानी की सप्लाई बंद हो गई। ग्राम सभा में नए बोर की स्वीकृति का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। पीएचई विभाग से अनुमति मिलने के बाद करीब 300 फीट तक बोरिंग कराई गई, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं निकलने से काम अधूरा छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वनग्राम कुमरुम में जल्द स्थायी पेयजल व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को गंदा पानी पीने की मजबूरी से राहत मिल सके।
———————

