बुजुर्ग की मौत, परिजनों ने हंडिया थाने में किया प्रदर्शन

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-हेड कांस्टेबल पर प्रताड़ना का आरोप, बर्खास्तगी और जांच की मांग

अनोखा तीर, हरदा। हरदा जिले के हंडिया थाना क्षेत्र में 80 वर्षीय बुजुर्ग अजबसिंह कोरकू की इंदौर में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि हंडिया थाने के हेड कांस्टेबल कंचनसिंह राजपूत की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने जहरीली दवाई का सेवन किया था। शनिवार को परिजनों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की थी, जिसके बाद रविवार को हंडिया थाने में शव रखकर प्रदर्शन किया गया। ग्राम रेलवा निवासी अजबसिंह कोरकू ने 1 मई को जहरीली दवाई का सेवन कर लिया था। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर ले जाया गया, जहां शनिवार रात उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मृतक के बेटे बलराम और बेटी छायाबाई ने आरोप लगाया कि हंडिया थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल कंचनसिंह राजपूत ने उनके पिता को डराया-धमकाया था। परिजनों के अनुसार, हेड कांस्टेबल ने 25 हजार रुपए लिए थे, जिसके बाद बुजुर्ग ने ग्राम खेड़ा से कीटनाशक खरीदकर उसका सेवन कर लिया।
जमीन को लेकर था विवाद
परिजनों ने बताया कि अजबसिंह ने करीब 18 साल पहले अपनी जमीन मुकेश विश्नोई को बेची थी। हाल ही में, हंडिया थाना क्षेत्र के कालीसराय निवासी रामौतार, मिश्रीलाल और सजन ने 25 साल पुराने स्टांप का हवाला देते हुए पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज कराई। उनका दावा था कि रामौतार और मिश्रीलाल के दादा हरिसिंह ने जमीन खोट ली थी और उसका पैसा नहीं दिया गया, जबकि वास्तव में शिकायतकर्ताओं को ही अजबसिंह को खोट के पैसे देने थे। बेटे बलराम ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधान आरक्षक कंचनसिंह राजपूत ने उनके पिता के साथ मारपीट की और उनसे कहा कि चाहे वे अपनी पत्नी, जमीन, मकान बेचें या खुद बिक जाएं, उन्हें 1.50 लाख रुपए खोट के लौटाने होंगे।
कंचन हटाओ, थाना बचाओ के नारे लगाए
रविवार दोपहर को इंदौर में शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा गया, जिसके बाद शव को हंडिया लाया गया। शव आने से पहले ही मृतक के परिजनों ने हंडिया थाने में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। शाम करीब 5.30 बजे बुजुर्ग के शव को हंडिया थाने के सामने रखकर प्रदर्शन किया गया। मृतक के बेटे चरणसिंह चौहान ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि उनके पिता को प्रताड़ित करने वाले हेड कांस्टेबल कंचनसिंह राजपूत को तत्काल बर्खास्त किया जाए। साथ ही, झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लोगों को जेल भेजा जाए। दूसरी ओर, एसडीओपी शालिनी परस्ते ने मृतक के परिजनों को समझाइश दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में निष्पक्ष जांच की जा रही है।
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