बदहाल व्यवस्था से बेहाल किसान

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-दिन में तेज धूप, रात में हवा-आंधी और बारिश के बीच खरीदी केंद्रों पर गुजर रही रातें

अनोखा तीर, मसनगांव। गेहूं खरीदी केंद्रों पर इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने पहुंचे किसान कई-कई दिनों से खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डटे हुए हैं, लेकिन तुलाई की धीमी गति और व्यवस्थाओं की कमी के कारण उन्हें दिन-रात खुले आसमान के नीचे समय बिताना पड़ रहा है। पिछले दिनों क्षेत्र के किसानों द्वारा मां अमृता वेयरहाउस के सामने किए गए आंदोलन के बाद वेयरहाउस में बदलाव किया गया, लेकिन शुभम वेयरहाउस पर भी एक दिन तुलाई होने के बाद दूसरे दिन से फिर केवल 10 ट्रॉलियों की तुलाई की जा रही है। इससे किसानों को उपज बेचने में पांच से छह दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में स्लॉट बुकिंग की तारीख निकलने पर किसानों को बिल बनने में भी दिक्कत आ रही है।
तीन स्थानों पर हो रही गेहूं की खरीदी
क्षेत्र में गेहूं की शासकीय खरीदी तीन स्थानों पर की जा रही है। इसमें मसनगांव समिति द्वारा सुल्तानपुर वेयरहाउस, पलासनेर समिति द्वारा शुभम वेयरहाउस तथा नीमगांव वेयरहाउस पर निजी कंपनी द्वारा खरीदी की जा रही है। सभी स्थानों पर किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइन लगी हुई है, जहां खरीदी के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। बताया जाता है कि जिले में पिछले साल तक शासकीय उपार्जन के लिए 120 खरीदी केंद्र बनाए गए थे, लेकिन इस साल मात्र 59 केंद्र बनाए गए हैं। वहीं खरीदी भी देरी से शुरू हुई है। ऐसे में किसान अपनी उपज की बिक्री के लिए खरीदी केंद्रों पर लाइन लगाकर खड़े हैं। विभाग द्वारा एक साथ 4500 क्विंटल प्रतिदिन की खरीदी के हिसाब से स्लॉट बुकिंग की गई है, लेकिन सभी स्थानों पर जगह और हम्मालों की कमी के कारण व्यवस्था खराब बनी हुई है। तेज गर्मी के इस दौर में दिनभर किसान तपती धूप में परेशान हो रहे हैं, वहीं रात में मौसम का मिजाज बदलने से तेज हवा, आंधी और बारिश का सामना करना पड़ रहा है।
खरीदी केंद्रों पर नहीं हैं पर्याप्त सुविधाएं
शासन द्वारा बनाए गए खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के ऊपर ही रात गुजारना पड़ रही है। वहीं शेड नहीं होने से किसानों को अपनी उपज बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ रहा है। मौसम खराब होते ही किसान रातभर जागकर गेहूं को भीगने से बचाने में लगे रहते हैं।  किसान अरविंद भायरे, जितेंद्र भायरे, पवन पाटिल और आयुष दीपावरे का कहना है कि स्लॉट बुकिंग के बाद भी समय पर तुलाई नहीं हो पा रही है। कई किसानों की उपज पांच से छह दिनों से खरीदी केंद्रों पर ट्रॉलियों में भरी खड़ी हुई है। केंद्रों पर हम्मालों की कमी और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण तुलाई कार्य धीमी गति से चल रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। खरीदी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है। किसानों के बैठने के लिए पर्याप्त छाया, पीने के पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं हैं। दिनभर गर्मी में परेशान किसान पेड़ों की छांव या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे बैठकर समय काटने को मजबूर हैं।
बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा
ज्येष्ठ माह में होने वाली मानसूनी गतिविधियों, आंधी, तेज हवा और बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा भी बना हुआ है। किसानों ने बताया कि यदि उपज भीग गई तो उसकी चमक और गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे समर्थन मूल्य पर खरीदी में परेशानी आएगी। किसानों ने प्रशासन से खरीदी व्यवस्था में सुधार, तुलाई कार्य में तेजी लाने और खरीदी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
शुभम वेयरहाउस में दो गोदाम होने के बावजूद नहीं हो रही तुलाई
ग्राम के किसान वृजमोहन रायखेरे ने बताया कि शुभम वेयरहाउस पर दो गोदाम बने हुए हैं, लेकिन खरीदी केवल छोटे गोदाम पर हो रही है। वहां किसानों की उपज पटकने के बाद जगह कम पड़ने से खरीदी पर ब्रेक लगा दिया गया है। ऐसे में सुबह से शाम तक मात्र 10 ट्रॉलियों की खरीदी हो रही है, जबकि खरीदी केंद्र पर 200 से अधिक किसान अपनी उपज लेकर खड़े हुए हैं।  उन्होंने बताया कि यदि प्रतिदिन 10 से 15 ट्रॉलियां ही चलेंगी तो 200 ट्रॉलियों की तुलाई में 20 दिन लग सकते हैं, जबकि वेयरहाउस का बड़ा गोदाम खाली पड़ा हुआ है। जिला प्रशासन को वहां खरीदी की अनुमति देना चाहिए, जिससे किसानों को राहत मिल सके। इस संबंध में विपणन संघ जिलाधिकारी योगेश  मालवीय ने बताया कि बड़े गोदाम के लिए अनुमति मांगी गई है। जल्द ही किसानों की उपज बड़े गोदाम में तौली जाएगी।
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