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Saturday, 24 October 2026
हरदा

नरवाई की आग से तबाही, किसानों को भारी नुकसान

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-डोलरिया में खेत के मकान रखे भूसे में भी लगी आग, 3 ट्राली भूसा जला
अनोखा तीर,नर्मदापुरम/डोलरिया। जिले के डोलरिया क्षेत्र में नरवाई में लगी भीषण आग से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। हजारों एकड़ में फैली आग से खेतों में खड़ी फसल, भूसा और हरी घास जलकर राख हो गई। कई किसानों के मकान और पशुओं के चारे भी आग की चपेट में आ गए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का माहौल बन गया है। डोलरिया में खेत के मकान में रखे भूसे में भी आग लग गई, जिससे 3 ट्रॉली भूसा जल गया। किसान जितेंद्र राजपूत ने बताया कि सेल रोड स्थित उनके खेत में रखे भूसे में अचानक आग लग गई। नरवाई की आग तेजी से फैलते हुए उनके मकान तक पहुंच गई, जहां रखा तीन ट्रॉली भूसा जल गया। आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और फायर ब्रिगेड की देरी से नुकसान और बढ़ गया। आईसीएआर की सेटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक 2090 नरवाई जलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें सिवनी मालवा में 1463, डोलरिया में 417, बनखेड़ी में 259, नर्मदापुरम में 80, इटारसी में 64 और माखननगर में 7 प्रकरण सामने आए हैं। यह आंकड़े प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। कलेक्टर सोनिया मीना के निर्देश पर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। लगातार जागरूकता के बावजूद नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। सिवनी मालवा में 5.46 लाख रुपये जुर्माना और 2 प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। बनखेड़ी के ग्राम कामती व कोंडापडरई में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। परसवाड़ा, बहरावन, माल्हनवाड़ा और पथकुही में 13 लोगों से 37500 रुपये जुर्माना वसूला गया। पिपरिया के तरौनकलां और सिंगनामा में 2 लोगों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं, क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता कम होती है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और आग फैलने से जान-माल का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही भविष्य में और सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। किसान सुरेन्द्र राजपूत ने बताया कि हर जिम्मेदार किसान अपने खेत की नरवाई को जलाना नहीं चाहता, लेकिन जब दूर से आग आती है तो वह अपने खेतों को भी नहीं बचा पाता। इससे कीमती वृक्ष और जमीन में रहने वाले जीव-जंतु नष्ट हो जाते हैं तथा धन हानि और जनहानि की स्थिति बनती है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के पास भी पर्याप्त साधन नहीं हैं, जिससे आगजनी की घटनाएं रोकी जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि किसान आर्थिक मंदी से गुजर रहा है। गेहूं खरीदी में देरी के कारण पैसों की कमी सामने आ रही है। लागत कम करने के चक्कर में कुछ किसान आग लगा देते हैं। नहर में पानी 27 तारीख से छोड़ा गया है, लेकिन होशंगाबाद के किसानों को 5 तारीख से पानी देने की बात कही जा रही है। इससे मूंग की बोनी लेट होगी और उत्पादन घटेगा, जिससे अगली फसल पर भी असर पड़ने की संभावना है और किसान कर्ज में दब सकता है।

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