बजरी भरकर जा रही ट्रेक्टर-ट्राली
खनन के मामले में अन्य क्षेत्र भी पीछे नही है। गहाल और जत्राखेड़ी के बीच बहने वाली माचक नदी से इनदिनों बजरी की बेतहाशा ढ़लाई की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक 15 से 20 ट्रेक्टर-ट्राली इन गोरखधंधे में लिप्त हैं। किंतु , विडंबना है कि जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर ध्यान तक नही है। उन्होंनें यह भी कहा कि मानो अधिकारी मौके पर पहुंच भी गए तो उन्हें यहां कुछ नही मिलता है। जबकि जिम्मेदार अधिकारियों से उम्मीद है कि ऐसे तत्वों को घेराबंदी कर मय वाहन के पकड़ा जाए। तब कहीं अवैध खनन से निजात मिलेगा। तभी नदी व उसके किनारे सुरक्षित रहेंगे।
खनन के यह भी दुष्प्रभाव
– अवैध खनन के कारण नजदीकी कृषि भूमियों पर बुरा असर पड़ता है।
– वन्य जीवों के अलावा दुर्लभ प्रजातियां भी अब विलुप्त हो रही हैं।
– मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जो दुर्घटना का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
– खेतों की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। जिससे उत्पादन पिछड़ता तय है।
यह बेहद जरूरी
– खुदाई से पहले गड्ढे के चारों तरफ फेंरिंग
– दुर्घटना ना हो इसके पुख्ता इंतजाम जरूरी
– जिले की सभी खदानों का निष्पक्ष सीमांकन
– जारी रायल्टी व खुद चुके खनिज का आंकलन
इनका कहना….
मैं पहले भी कलेक्टर को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान आकर्षित करा चुका हूॅ। परंतु जिले में अवैध खनन को लेकर प्रशासन व खनिज विभाग की कार्यवाही शून्य है। छोटे ट्रेक्टरों को पकड़कर खानापूर्ति करते हैं। जल्द विधानसभा में जिलेभर की समस्त खदानों के सीमांकन का मुद्दा उठाउंगा, तभी अनुमति व अवैध दोहन का सही आंकलन होगा।
डॉ रामकिशोर दोगने विधायक-हरदा
सभी खदानों में रायल्टी से अधिक मात्रा में खुदाई हुई है। जिसकी तस्वीर जगजाहिर है। इस अवैध कारोबार के कारण शासन को राजस्व का भारी नुकसान पहुंच रहा है, जो कि अपने आप में गंभीर मामला है। ऐसा इसलिये क्योंकि राजस्व के साथ साथ पर्यावरण एवं प्राकृतिक संपदाओं का भरसक दोहन जारी है। जिस पर प्रभावी अंकुश की दरकार है।
दीपक सारन, युवा नेता
ग्रामसभा अथवा पंचायत से अनुमति लेकर ही खनन कार्य संभव है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि किस प्रायोजन के लिए खनन किया जाएगा। तमाम अनुमतियों से लेकर खुदाई का आधार भी जांच का मुख्य बिन्दू है। क्योंकि, कई बार इन्हें नजरअंदाज करने की बात सामने आती रही हैं।
दिनेश लेगा, किसान नेता

