मिलीभगत या मनमानी ?

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शराब दुकान के बाहर बेखौफ छलका रहे जाम
– यहां-वहां फैली बॉटल व खाली पाऊच  
– पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान
पूरे प्रदेश में शराब दुकान से लगे अहाता बार बंद है। जो कि सरकार की बेहतर पहल माना जा रहा था। परंतु, इसके सकारात्मक परिणामों से ज्यादा दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इनके बीच मिलीभगत और मनमानी को बल मिलता। इतना ही नही, मुख्यायल समेत तहसील मुख्यालय से लगी शराब दुकानों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसा लगता है मानों अहाता बार बंद हुए नही हुए बल्कि ओर बढ़ गए हैं। ऐसा ही कुछ हंडिया क्षेत्र के ग्राम कुसिया में देखने को मिलेगा। जहां शाम ढ़लते ही दुकान के इर्दगिर्द नशेडियों का जमघट लग जाता है। जिससे पर्यावरण तथा ग्रामीण वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़् रहा है।
अनोखा तीर, हरदा।  जिले के हंडिया तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम कुसिया में स्थित कम्पोजिट शराब दुकान पर उसके विक्रय से ज्यादा बैठक व्यवस्था का बोलबाला है। दुकान के आसपास खाली तथा फूटी कांच की बॉटले पड़ी हुई। वहीं पानी के खाली पाऊच उड़-उड़कर करीबी खेतों तक पहुंच रहे हैं। इतना ही नही, यहां ग्राहकों के लिए बकायदा टेबल भी लगा दिए हैं। ताकि उन्हें शराब खरीदने व पीने में कोई दिक्कत ना हो। वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक के पाऊच से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही अत्यधिक नशे के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का माहौल खराब होना लाजमी है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक कम्पोजिट शराब की दुकान पर लोग सुबह से पहुंच जाते हैं। वहीं शराब, वहीं पानी और वहीं पर लगा-लगाया टेबल फिर क्या बात है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शराब विक्रेता अपने ग्राहकों को शराब के अलावा उसके साथ लगने वाले ग्लास, नमकीन और पानी के पाऊच भी मुहैया कराते हैं, जो कि उनकी अतिरिक्त कमाई है। इसलिए दुकानदार आसपास बैठाकर शराब पिलवाने में ज्यादा रूचि ले रहे हैं। खैर, यह सब तो संबंधित विभाग की आंक खोलने का छोटा सा प्रयास है। लेकिन बड़ी बात यह है कि इन्दौर हाइवे से विभिन्न विभागों के अफसरों का आना-जाना लगा रहाता है। परंतु, कभी भी किसी जिम्मेदार अधिकारी ने शराब दुकान व उसके आसपास की स्थिति का निरीक्षक तक नही किया। जो इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस संबंध में जिला अधिकारी संजय भोजने से चर्चा करने पर उन्होंनें इसे नियमों के विरूद्व बताया है। साथ ही अगले दिन कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।
—-न्यूज इन बाक्स—-
दुकान से गांव-गांव सप्लाई
यह भी बताना होगा कि कुसिया की कम्पोजिट शराब दुकान से तड़के शराब की सप्लाई रवाना हो जाती है, जो कि गांवों तक पहुंचाते हैं। सूत्रों के मुताबिक सप्लाई का ये काम रात के अंधेरे अथवा सुबह के समय किया जाता है। यह भी बताया कि गांव-गांव शराब बेचने वाले इनके एजेंटो की बकायदा हिसाब-किताब की डायरी बनी हुई है।
—-न्यूज इन बाक्स—-
युवा ग्रामीणों ने रोकी थी गाड़ी
उल्लेखनीय है कि गांव-गांव अवैध तरीके से शराब विक्रय करने से नाराज ग्रामीण युवाओं ने कुछ समय पहले मोर्चा खोल दिया था। उस समय ठेकेदार की गाड़ी को रोककर उसमें रखी शराब को विधिवत जप्त करने की मांग पर अड़ गए थे। हालांकि कुछ समय बाद वही हालात बन गए हैं। जिस पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत है।
—–न्यूज इन बाक्स—-
यही हाल मुख्यालय पर भी देखने को मिल जाएगा। खेड़पुरा नाके पास स्थित दुकान से लोग शराब खरीददार अजनाल के स्टॉम डेम के आसपास डेरा देते हैं। अपने कार्यो को अंजाम देने के बाद कचरा वहीं छोड़ जाते हैं। जो अजनाल मेें प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। इसी तरह खंडवा बायपास के आसपास खेत पहुंच मार्गो पर भी शाम से लेकर देर रात तक शराबियों का जमघट रहता है। जबकि नजदीक में एक स्कूल है। बावजूद ऐसे तत्वों से सख्ती के साथ नही निपटा जा रहा है, जो कि लंबे समय से जनचर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय किसानों के मुताबिक शराबियों का रात में फैलाया हुआ कचरा सुबह देख सकते हैं। यही प्लास्टिक की पन्नी कहीं ना कहीं खेतों तक पहुंच ही जाती है। किसानों के अनुसार यहां रात में नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बेहद जरूरी है, तभी असमाजिक तत्वों में खौफ पनपेगा।

जिम्मेदार बोलें ….
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है, जो कि गलत है। मैने वीडियो भी पूरा देखा है। अगर कोई शराब दुाकनदार इस तरह से अव्यवस्था फैलाएगा तो कार्रवाई की जद में आएगा। संबंधित पर नियम अनुरूप कार्रवाई करेंगे।
संजय भोजने
जिला आबकरी अधिकारी

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