अनोखा तीर, देवास। भागवत कथा में शिव विवाह और ध्रुव चरित्र की कथाएं भक्तों को अटूट विश्वास, दृढ़ संकल्प और ईश्वर भक्ति का संदेश देती हैं, जहां शिव-पार्वती विवाह प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, वहीं ध्रुव चरित्र सौतेली मां के तिरस्कार से उत्पन्न बालक ध्रुव की तपस्या और तपस्या से विष्णु-प्राप्ति की कहानी है, जो हर मुश्किल में ईश्वर को याद करने का महत्व सिखाती है। उक्त उद्गार सिविल लाइन गार्डन में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस व्यासपीठ से महामंडलेश्वर 1008 श्री स्वामी शान्ति स्वरूपानंद गिरि जी महाराज, चारधाम मंदिर उज्जैन ने कहीं। कथा के शुभारंभ के पूर्व व्यासपीठ की पूजा व आरती मुख्य यजमान श्रीमती पुष्पा विपिन कुमावत आशीष कुमावत, गोवर्धन लाल कुमावत, प्रियंका कुमावत ने की। कथा के दौरान सुमधुर भजनों की प्रस्तुति भी दी गई। शिव-पार्वती विवाह का सचित्र वर्णन हुआ। कथा 9 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक चलेगी। कथा में आज तृतीय दिवस भक्त प्रहलाद चरित्र की कथा का प्रसंग होगा। स्वामी शान्तिस्वरूपानन्द जी महाराज ने आगे कहा कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के अपमान से व्यथित होकर आत्मदाह कर लिया, तब भगवान शिव गहरे विषाद में तपस्या में लीन हो गए। सती ने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया और बचपन से ही शिव को अपना पति मान लिया। पार्वती ने शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की। अंतत: भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पार्वती से विवाह किया, जो सनातन धर्म में एक दिव्य और प्रेरणादायक कथा है। स्वामी जी ने धु्रव चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि ध्रुव राजा उत्तानपाद के पुत्र थे। उनकी सौतेली मां (सुनीति) के व्यवहार से अपमानित होकर, उन्होंने अपने पिता से प्रेम पाने के लिए घर छोड़ दिया और वन में चले गए। रास्ते में देवर्षि नारद मिले। उन्होंने ध्रुव को ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने और भगवान विष्णु की तपस्या करने का उपदेश दिया। ध्रुव ने नारद जी की बात मानी और एक पैर पर खड़े होकर छह महीने तक कठोर तपस्या की। भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। उन्होंने ध्रुव को आकाश में ध्रुव तारा के रूप में एक स्थायी स्थान प्रदान किया, जो दृढ़ संकल्प और ईश्वर में आस्था का प्रतीक है। द्वितीय दिवस की कथा के समापन की आरती पार्षद प्रतिनिधि अजबसिंह ठाकुर, गंगासिंह सोलंकी, एसएम जैन, राधाकृष्ण यादव, गिरीश निगम, कश्यप जी, आरएस केलकर, महेन्द्र सोनगरा, गोपाल देवलिया, जयराम वर्मा, डॉ. प्रमेन्द्र कुमावत, मंदीप सुराली, सुरेश व्यास सहित स्थानीय रहवासियों व भक्तों ने संयुक्त रूप से की। समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से इस पुण्य अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।
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