अनोखा तीर, मसनगांव। तवा डैम के अंतिम छोर पर आने वाले रेवापुर सबडिवीजन में पिछले 15 दिनों से पलासनेर रेलवे लाइन के नीचे की नहर सूखी पड़ी हुई है। नहर में पानी नहीं आने से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि बुवाई को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है। समय पर पानी नहीं मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। पलासनेर के किसान रामविलास पटेल, सुनील यादव और सेवकराम पटेल ने बताया कि रेवापुर सबडिवीजन में पानी की लगातार कमी बनी हुई है। कई खेतों में अब तक पहला पानी भी नहीं लग पाया है, जिससे फसलों की बढ़वार कमजोर बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दो-चार दिनों में पानी नहीं मिला तो कई किसानों की फसल सूखने की कगार पर पहुंच जाएगी, जिससे खरीफ के साथ रबी सीजन की फसलों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है। गांगला के किसान भगवानदास रायखेरे, जुगल किशोर रायखेरे, आमिर पटेल सहित अन्य किसानों ने बताया कि रेवापुर सबडिवीजन के अंतर्गत गहाल, धुरगाड़ा, सुखरास, खामापड़वा, पलासनेर, गांगला, नीमगांव, डोमनमऊ और रेवापुर तक के खेतों में नहर के माध्यम से सिंचाई होती है। इसके लिए जल संसाधन विभाग द्वारा ओसरा बंदी लागू कर ऊपरी क्षेत्र की नहर को शाम के समय बंद किया जाता है, ताकि पानी नीचे के क्षेत्रों तक पहुंच सके। लेकिन इस वर्ष ऊपरी हिस्से में ही पानी कम होने से इसका असर टेल क्षेत्र तक पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों तवा डैम से पानी कम किए जाने का असर क्षेत्र की नहरों पर पड़ा। बाद में जब पानी बढ़ा तो ऊपरी क्षेत्रों में सिंचाई शुरू हो गई, जिससे निचले हिस्सों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों का कहना है कि विभाग को हेड से लेकर टेल तक एक साथ सुबह-शाम पानी चलाना चाहिए, ताकि सभी किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सके। बताया गया कि जल संसाधन विभाग के एसडीओ मौसम पोर्ते के पास सामरधा और रेवापुर दोनों सबडिवीजन का प्रभार है। दो सबडिवीजन और एसआईआर का एक साथ दायित्व होने के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। इसका सीधा असर रबी सीजन की प्रमुख फसलों गेहूं, चना और मक्का पर पड़ रहा है। इस संबंध में एसडीओ मौसम पोर्ते ने बताया कि पिछले तीन दिनों से नहर में पानी कम होने और एक साथ मांग बढ़ने के कारण समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मंगलवार तक टेल क्षेत्र में पानी पहुंचा दिया जाएगा।
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