-जिले की सिंचाई व्यवस्था हो सकती है प्रभावित
अनोखा तीर, मसनगांव। जल संसाधन विभाग द्वारा रबी सीजन के लिए नहर में छोड़े जा रहे पानी को तवा डेम से शनिवार को 3200 क्यूसेक कम किए जाने का असर जिले की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार इटारसी के पास तिखड़ जमानी में नहर में डूबने से दो लोगों की मौत के बाद शवों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इसी कारण नर्मदापुरम प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर नहर में पानी कम कराया गया, जिसे बाद में बढ़ाया गया। पानी कम किए जाने का असर सिवनी और हरदा जिले के किसानों की सिंचाई पर पड़ रहा है। तवा डेम से जिले के लिए चैन क्रमांक 3008 पर पहले 2000 क्यूसेक पानी दिया जा रहा था, जो लगातार घटता गया। रविवार को यह घटकर 1700 क्यूसेक रह गया। पानी कम होने का असर रविवार को स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। शनिवार से पानी घटने के बाद रविवार को मुख्य शाखा में ही करीब एक से डेढ़ फीट पानी कम हो गया, जिसका सीधा असर टेल क्षेत्र की सिंचाई पर पड़ेगा।
आठ दिन से बंद रही नहर, दो दिन से रात में आ रहा पानी
जल संसाधन विभाग द्वारा पिछले आठ दिनों से नहर में पानी कम किए जाने से जिले में पानी वितरण की व्यवस्था गड़बड़ा गई थी। गुरुवार से व्यवस्था में हल्का सुधार हुआ था, लेकिन शनिवार से फिर पानी कम होने के कारण टेल क्षेत्र में आने वाले सोनतलाई और रेवापुर सहित हंडिया कैनाल के सब डिवीजन में भी असर पड़ने की आशंका है।
फसलों में चल रहा पहला और दूसरा पानी
रबी सीजन की फसलों में इन दिनों कहीं पहला तो कहीं दूसरा पानी चल रहा है। फसलों की बुआई को एक से डेढ़ महीना हो चुका है। ऐसे में गेहूं, चना, मक्का और सरसों जैसी फसलों के लिए पानी की आवश्यकता बनी हुई है। नहर में पानी कम किए जाने से समय पर सिंचाई नहीं हो पाने की स्थिति में फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। क्षेत्र के किसानों ने जल संसाधन विभाग से नहर में लगातार पानी चलाने की मांग की है। ग्राम के किसान राकेश पाटिल, सरवन रायखेरे, आशिष छलौत्रे, पवन पाटिल, दीपक छलौत्रे सहित अन्य किसानों ने अधिकारियों से नहर में पर्याप्त गेज पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
कम पानी से बिगड़ सकती है व्यवस्था
तवा डेम से पानी कम किए जाने के बाद जिले की पानी वितरण व्यवस्था बिगड़ सकती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में सिंचाई व्यवस्था के लिए 1950 से 2200 क्यूसेक पानी की आवश्यकता रहती है। चैन क्रमांक 3008 से हंडिया की ओर जाने वाली एचवीसी और हरदा की ओर आने वाली एलवीसी से करीब 40 हजार किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। इनमें एलवीसी से ही लगभग 19 हजार हेक्टेयर रकबे में सिंचाई होती है। विभाग द्वारा हेड से टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जाती है, लेकिन तवा डेम से पानी कम छोड़े जाने पर यह व्यवस्था बिगड़ जाती है। पिछले दिनों पानी कम छोड़े जाने के कारण आठ दिन तक नहर में पानी नहीं आया, जिससे किसान सिंचाई नहीं कर पाए। इसके चलते हेड से टेल तक एक साथ पानी की मांग बढ़ गई और विभाग को सब डिवीजन में ओसराबंदी लागू करनी पड़ी। वर्तमान में 12 घंटे ऊपरी क्षेत्र की शाखाओं और 12 घंटे निचले क्षेत्र की शाखाओं में पानी दिया जा रहा है। ऐसे में यदि तवा डेम से फिर पानी कम होता है तो वितरण में और दिक्कतें आ सकती हैं, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ सकता है। सोनतलाई सब डिवीजन के एसडीओ रोहन विलियम्स ने बताया कि तवा डेम से 3200 क्यूसेक पानी डूबने वालों की तलाश के लिए रोका गया था, जिसे अब वापस बढ़ा दिया गया है। लेकिन रविवार को विभाग द्वारा फिर ६०० क्यूसेक पानी कम कर दिया गया।
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