दिनेश निगम ‘त्यागीÓ
कांग्रेस नेताओं को सुधार पाएगी राहुल की नसीहत….!
प्रदेश कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या पार्टी के दिग्गज नेता हैं। इनकी वजह से ही पार्टी ऊपर से नीचे तक गुटों में बंटी है। पिछले दिनों पचमढ़ी आए राहुल गांधी ने नेताओं की बैठक में अपना फोकस इसी मुद्दे पर केंद्रित रखा। उन्होंने इस बात पर नाखुशी जाहिर की कि वरिष्ठ नेताओं में समन्वय की कमी है, जबकि सियासत ऐसी नहीं होना चाहिए कि पार्टी को नुकसान हो। नेताओं का अपना-अपना एजेंडा न हो। उन्होंने नसीहत दी कि एकला चलो नहीं चलेगा, मिलजुल कर काम करें। तभी सत्ता में होगी वापसी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में हम मालूम अंतर से चुनाव हारे हैं, मिलकर काम करेंगे तो सफलता जरुरी मिलेगी। राहुल ने कहा कि सभी नेताओं से समन्वय की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष की है। उन्होंने निर्देश दिए कि पॉलिटिकल अफसर कमेटी की बैठक अब हर माह हो, जिसमें राजनैतिक मामलों पर चर्चा होने के साथ आगे की रणनीति पर भी विचार मंथन हो। बैठक नियमित होगी तो समन्वय की कमी नहीं रहेगी। कांग्रेस के दिग्गजों को यह नसीहत पहली बार नहीं मिली, पहले भी इसके लिए उन्हें चेताया जा चुका है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल की नसीहत नेताओं को सुधार पाएगी? या पहले की तरह उनका ‘अपनी ढपली, अपना रागÓ चालू रहेगा। प्रदेश में कांग्रेस की बदतर हालत के जवाबदार ये नेता ही तो हैं।
अलग राह चुन शिवराज पर भारी पड़ गए मोहन…
विवाह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बेटे अभिमन्यु का हो रहा है और चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आ गए। वजह है दोनों के बेटों के विवाह का तरीका। डॉ यादव ने पहले अपने बेटे की सगाई बहुत सादगी के साथ की थी, अब घोषणा कर दी की वे बेटे का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में करेंगे। ऐसा कौन होगा जो मुख्यमंत्री की इस सादगी पर न मर मिटेगा। मुख्यमंत्री के बेटे की शादी खरगोन के एक किसान की बेटी इशिता के साथ हो रही है। यह 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में होगी। इसमें 20 अन्य समाजों के जोड़ों के भी विवाह होंगे। मुख्यमंत्री डॉ यादव अपने बेटे-बहू के साथ अन्य जोड़ों को भी उपहार देंगे। इससे पहले प्रदेश सरकार में मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने ही अपने बेटे-बेटी की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलनों में की थी। दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री शिवराज के बेटों की शादियां इससे पहले हुई थीं। इनमें शाही तामझाम थे। भोपाल में दो स्थानों के अलावा दिल्ली और राजस्थान में भव्य कार्यक्रम हुए थे। वीआईपीज के साथ हजारों लोगों को आमंत्रित किया गया था। इस तरह शिवराज के बेटों की शादियां शाही अंदाज में हुई थीं। डॉ.यादव के बेटे की शादी के साथ शिवराज की चर्चा इस फर्क को लेकर ही है। मुख्यमंत्री के पास भी कोई कमी नहीं है। वे भी अपने बेटे की शादी शाही तरीके से कर सकते थे। लेकिन ऐसा न कर वे शिवराज पर भारी पड़ गए।
इस समाज सुधारक को मंत्री ने कह दिया दलाल…
देश में अब तक जिन राजा राममोहन राय को बड़ा समाज सुधारक माना जाता है। जिन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह और जातिवाद जैसी कुप्रथाओं का विरोध किया था। जिन्हें ‘भारतीय पुनर्जागरण के जनकÓ के रूप में भी जाना जाता है। इतिहास में जिनके द्वारा समाज सुधार के लिए चलाए गए कई अभियान दर्ज हैं। आजादी के इतने साल बाद उन्हें अंग्रेजों का दलाल कह दिया गया। यह बात किसी सामान्य व्यक्ति ने नहीं बल्कि आरएसएस से जुड़े रहे और प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कही। बिरसा मुंडा की जयंती और जनजातीय गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि हमें देश को आजादी दिलाने वाले सच्चे वीरों के बारे में कभी नहीं पढ़ाया गया। मंत्री ने कहा कि देश में कई लोगों को फर्जी समाज सुधारक बना रखा गया है। इनमें से एक राजा राम मोहन राय भी हैं। वे अंग्रेजों के दलाल के रूप में काम करते थे। हालांकि इतिहास में उन अधिकांश स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दर्ज हैं जिन्होंने आजादी के लिए बलिदान दिया। फिर भी देश में एक वर्ग महात्मा गांधी सहित ऐसे कई सेनानियों की आलोचना करता है, जिसने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए खपा दिया। बहरहाल, मंत्री के इस विवादित बयान पर बवाल तय था सो शुरू हो गया। संघ अथवा भाजपा की इस पर कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई लेकिन मंत्री जी को अगले ही दिन फटकार पड़ी और उन्हें माफी मांगना पड़ गई। भाजपा ने कहा अब इस मामले को यहीं समाप्त मान लेना चाहिए।
मोहन ने यदुवंशियों में फीका किया तेजस्वी का तेज…!
बिहार विधानसभा चुनाव में राजग की बड़ी जीत केवल नरेंद्र मोदी, नीतीश और स्थानीय लहर का नतीजा नहीं, बल्कि परदे के पीछे थी ‘मप्र मॉडलÓ की रणनीति, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आक्रामक ग्राउंड मैनेजमेंट स्टाइल और भाजपा के शीर्ष नेताओं की माइक्रो-इंजीनियरिंग, इसने मिलकर ऐसा राजनीतिक समीकरण गढ़ा कि महागठबंधन चारों खाने चित्त हो गया। बिहार के जनादेश में जो साइलेंट स्ट्राइक दिखी, उसकी धड़कनें मप्र की राजधानी भोपाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक महसूस की जा रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं के प्रचार वाली अधिकांश सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की है। बिहार विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का भी इम्तिहान था। उन्होंने बिहार की जिन 25 सीटों पर प्रचार किया, उनमें से 21 पर एनडीए प्रत्याशी जीते। बिहार विधानसभा चुनाव में डॉ यादव की परफार्मेंस उन्हें भाजपा में राष्ट्रीय फलक पर पिछड़े वर्ग की राजनीति में मजबूत चेहरे के तौर पर स्थापित कर सकती है। चुनाव में मोदी की लोकप्रियता और मोहन यादव का प्रभाव एनडीए के लिए सकारात्मक समीकरण बना। डॉ यादव की सक्रियता से बिहार में भाजपा को सामाजिक संतुलन मिला और तेजस्वी का यादव कार्ड पूरी तरह नहीं चल सका। जिससे एनडीए के लिए नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर बने।
राजनीति का मोहरा तो नहीं बन गईं डीएफओ नेहा…!
बालाघाट जिले की कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाने वाली डीएफओ नेहा श्रीवास्तव पर मुसीबत आने वाली है। उन्होंने शिकायत कर आरोप लगाया था कि मुंजारे ने उनसे 2-3 पेटी (लाख) की रिश्वत मांगी और अभद्र व्यहार किया। इसे लेकर भाजपा ने बालाघाट में विधायक के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। मामले के ज्यादा तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री ने जांच के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। इसमें एपीसीसीएफ कमलिका मोहंता और वन संरक्षक बासु कनौजिया को सदस्य बनाया था। इन दोनों महिला वन अफसरों ने जांच रिपोर्ट में विधायक अनुभा को क्लीनचिट दे दी। अनुभा का कहना है कि ‘नेहा को पूर्व मंत्री और उनकी बेटी ने अपना मोहरा बनाकर मुझे बदनाम करने की साजिश की थी। अधिकारी का इस तरह जनप्रतिनिधियों पर बिना किसी तथ्य के आरोप लगाना गलत है। ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। वह इसे लेकर न्यायालय में मानहानि का केस दायर करेंगी।Ó नेहा की मुसीबत इसलिए बढ़ेगी कि जब वे अपने विभाग की अफसरों के सामने खुद को सच साबित नहीं कर सकीं तो न्यायालय में कैसे करेंगी? लगता है नेहा ने विरोधी पक्ष का विधायक होने के कारण अनुभा पर आरोप जड़ दिए और राजनीति का मोहरा बन गईं। अब उनके पास विधायक से क्षमा मांगने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं दिखता।
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