कड़ाके की ठंड में बच्चों की सेहत दांव पर ।

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अभिभावकों की चीख अनसुनी, प्रशासन अब भी नींद में!

स्कूल समय परिवर्तन की मांग तेज,

खरगोन : ज़िले में ठंड ने विकराल रूप ले लिया है, सुबह की तेज़ शीतलहर से जहां बड़े-बुजुर्ग तक घरों में दुबके बैठे हैं, वहीं नन्हें-मुन्ने बच्चों को अब भी उसी समय स्कूल भेजा जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि “ठंड से कांपते बच्चे स्कूल जा रहे हैं, और प्रशासन अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।” नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए समय परिवर्तन की मांग अब जोर नहीं, तूफ़ान बन चुकी है, लेकिन हैरानी की बात है कि प्रशासन की नज़र अभी भी इस गंभीर मुद्दे पर नहीं पड़ी है। अभिभावक खुले शब्दों में कह रहे हैं कि “जब ठंड से बड़ा-बड़ा कामकाज बंद हो रहा है, तो मासूम बच्चों को क्यों खतरे में डाला जा रहा है ?” जानकारों का कहना है कि समय रहते स्कूल समय न बदलना छोटे बच्चों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। लोगों का स्पष्ट संदेश है कि प्रशासन अब और देरी न करे और तुरंत निर्णय लेते हुए स्कूल व आंगनवाड़ी केंद्रों का समय सुबह 9 बजे या बाद का घोषित करे। अभिभावक चेतावनी के लहज़े में कह रहे हैं “अगर प्रशासन अभी भी नहीं जागा, तो हम इस मुद्दे को बड़े आंदोलन में बदलने से भी पीछे नहीं हटेंगे।” अब पूरा शहर एक ही सवाल पूछ रहा है क्या प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा या कड़ाके की ठंड में उन्हें यूं ही ठिठुरने छोड़ेगा?

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