क्या साकार होगा सीएम के झुग्गी मुक्त मध्यप्रदेश का सपना?

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पिछले 40 वर्षों से कागजों में दौड़ते रहे सरकारी घोड़े, बढ़ती गई झुग्गियां

‘ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया’ इस लोक कहावत को चरितार्थ करती मध्यप्रदेश में नित्य नई झुग्गियां उगती ही जा रही है। सरकारी स्तर पर झुग्गियां मुक्त करने के दावे तो 1984 में मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह द्वारा भी किए गए थे। इंदिरा आवास कुटी के रुप में प्रारंभ हुई यह योजना ऊंट के मुंह में जीरे समान थी। उसके बाद स्व. बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्रीकाल में और फिर सबसे लंबे समय प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने का खिताब हासिल करने वाले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी यह अभियान पीएम आवास योजना के रुप में चलाया गया। लेकिन प्रदेश तो दूर बल्कि प्रदेश की राजधानी भोपाल भी झुग्गी मुक्त नहीं हो पाई। आज भी भोपाल में शासकीय रिकार्ड के अनुसार 72 बस्तियां झुग्गी युक्त है। जबकि इससे कई अधिक वह झुग्गियां है जो कि शासकीय रिकार्ड में आज भी रिक्त भूमि या शासकीय भूमि के रुप में दर्ज है। हाल ही में मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फिर झुग्गीमुक्त मध्यप्रदेश का सपना देखा है। मुख्यमंत्री का यह सपना कितना साकार और धरातल पर चरितार्थ होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसके लिए न केवल सरकारी स्तर पर अपितु पीपीपी (पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप) योजना के तहत भी शहर से झुग्गियों को हटाकर पक्के फ्लेट बनाने की दिशा में कार्ययोजना बनाई है। अगर मुख्यमंत्री की यह कार्ययोजना वास्तव में कारगर साबित होती है तो निश्चित ही आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश झुग्गी मुक्त हो सकता है।

प्रहलाद शर्मा, हरदा- मध्यप्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव इन दिनों प्रदेश के चौमुखी विकास की योजना संजोकर उसे साकार करने की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्रांति लाने के लिए निरंतर सक्रिय है तो वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को अपनी प्राथमिकता सूची में रखकर प्रदेश को पर्यटन विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का जतन कर रहे है। इन दोनों ही प्रयासों से मुख्यमंत्री प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर सीधे रोजगार मुहैया कराने की कवायद में जुटे है तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने मध्यप्रदेश को झुग्गी मुक्त प्रदेश बनाने का भी सपना संजोया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा है कि वह आगामी पांच वर्षों में भोपाल सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश को झुग्गीमुक्त कर देंगे। इसके लिए उन्होंने पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप मोड को अपनाते हुए समूचे प्रदेश में ३० हजार फ्लेट के साथ ही झुग्गियों के स्थान पर वन बीएचके फ्लेट बनाकर देने का भी प्लान बनाया है। सरकारी स्तर पर झुग्गी मुक्त मध्यप्रदेश  की कल्पनाएं तो पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा भी की जाती रही है। 1984 में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. अर्जुन सिंह ने पहली बार इस दिशा में कदम उठाया था। लेकिन वह जमीनी स्तर पर साकार नहीं हो पाया। इसके बाद सरकारों ने कभी इस दिशा में गंभीरता से कोई कार्ययोजना नहीं बनाई। 2004 में जब स्व. बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने झुग्गियों के पुनर्वास हेतु कार्ययोजना बनाई थी। लेकिन स्व. गौर को बतौर मुख्यमंंत्री कार्य करने का लम्बा समय नहीं मिल पाया। तत्पश्चात 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने अपने तीसरे कार्यकाल में पीएम आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाने और पट्टे देने का एक अभियान चलाया। इस योजना के तहत सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तो मध्यप्रदेश में 37 लाख पक्के मकान बनाए जा चुके है। लेकिन बावजूद इसके प्रदेश का एक भी शहर आज तक झुग्गी मुक्त नहीं हो पाया है। प्रदेश के अन्य शहरों की तो बात दूर बल्कि स्वयं राजधानी भोपाल आज भी झुग्गियों से घिरी हुई है। स्वयं सरकार के रिकार्ड बताते है कि केवल भोपाल में 650 एकड़ जमीन पर 72 झुग्गी बस्तियां बसी हुई है। करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन पर बसी इन झुग्गियों को लेकर राजनीतिक ब्यानबाजियां तो खूब होती रही है, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। चुनावी सालों में वोटों की राजनीति के चलते प्रदेश के तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सार्वजनिक मंचों से कहते रहे कि प्रदेश में जो व्यक्ति जिस स्थान पर झुग्गी बनाकर रह रहा है उसे उसी स्थान का पट्टा भी दिया जाएगा और पीएम आवास योजना के तहत राशि भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री की इस सार्वजनिक घोषणा के चलते प्रदेश में नित्य नई झुग्गियां उगने लगी। वहीं प्रदेश में शहरों के भीतर रिक्त पड़ी बहुमूल्य शासकीय भूमियों पर रातोंरात नई झुग्गियां खड़ी होने लगी। स्थानीय प्रशासन ने भी राजनीतिक दबाव के चलते ऐसी झुग्गियों पर कभी अंकुश लगाने की कवायद नहीं की। परिणामस्वरुप प्रदेश में जितनी झुग्गियां पक्के मकान में परिवर्तित नहीं हुई उससे कई गुना नई झुग्गियां बनकर खड़ी हो गई। आज हालात यह है कि प्रदेश के लगभग शहरों में बस स्टेण्ड, अस्पताल, रेलवे स्टेशन तथा शहर के बाहरी क्षेत्रों में शासकीय भूमियों पर नई-नई झुग्गी बस्तियां आकार ले चुकी है। इसमें अनेक शहरों में तो नदी-नालों के उन तटवर्तीय क्षेत्रों में झुग्गियां बनकर बसीगत हो गई है जहां प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु दौरान बाढ़ का पानी भराता है। जिसके चलते यह झुग्गी क्षेत्र बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल होकर प्रतिवर्ष सरकारी खजानों से करोड़ों रुपए की राहत राशि वितरण के बाद भी जस के तस बने रहते है। इस दिशा में न तो कभी स्थानीय प्रशासन ने गंभीरता पूर्वक पहल की है कि आखिर बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों में शासन की भूमियों पर यह झुग्गियां कैसे बस गई? और ना ही इन्हें हटाकर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोई पहल की गई। झुग्गी माफियाओं का यह जाल प्रदेश के लगभग हर शहर में फैला हुआ है। जिन लोगों ने शासकीय योजनाओं के तहत पक्के आवास का लाभ ले लिया है वह भी उन आवासों को किराये पर देकर नई झुग्गी बनाकर रहने लगते है। वर्षों से चला आ रहा झुग्गियों का यह खेल क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में थम जाएगा? क्या वास्तव में मुख्यमंत्री प्रदेश को झुग्गी मुक्त बना पाएंगे? ऐसे अनेक सवाल निश्चित ही आम लोगों के जहन में घर कर रहे है। लेकिन मुख्यमंत्री ने इससे निजात पाने का जो नायाब तरीका खोजा है अगर वह वास्तव में साकार हुआ तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में झुग्गी मुक्त हो सकता है।

ऐसे होगा झुग्गी मुक्त प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की योजना अनुसार पहले भोपाल में अभियान चलाया जाएगा। जिसके तहत पीपीपी मोड के तहत सरकार बिल्डरों को प्राईम लोकेशन पर व्यावसायिक उपयोग के लिए जमीन देगी। बिल्डर इसके बदले झुग्गियों को हटाकर वहां पर पक्के वन बीएचके के फ्लेट बनाएंगे। झुग्गी वासियों को इस दौरान झुग्गियों से हटाकर किराये के मकानों में भेजा जाएगा। इन मकानों का किराया पक्के फ्लेट तैयार होने तक बिल्डर द्वारा दिया जाएगा। पक्के मकान बनने के बाद उन्हें वापस इन मकानों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। झुग्गी बस्तियों वाले जिन क्षेत्रों में भूमि रिक्त की जाएगी वहां बिल्डरों द्वारा मल्टी स्टोरी फ्लेट्स बनाकर देने के बाद शेष बची भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयोग में लाया जाएगा। इसके तहत भोपाल में 30 हजार फ्लेट्स बनाने की प्रारंभिक योजना है। इसी तरह प्रदेश के प्रत्येक शहर के हर कोने में जहां भी झुग्गियां बसी हुई है उन सबको हटाकर एक व्यवस्थित और आधुनिक शहर बसाने का प्रयास किया जाएगा। प्रत्येक जिला कलेक्टर को जिले के हर शहर के झुग्गी क्षेत्र और वहां पर बनी झुग्गियों की सूचियां तैयार करने तथा नई झुग्गी किसी भी परिस्थिति में नहीं बनने देने के निर्देश दिए जाएंगे। तत्पश्चात एक साथ प्रदेश के सभी शहरों में झुग्गियों को हटाकर वहां मल्टीस्टोरी फ्लेट्स बनाने का कार्य शुरु किया जाएगा। सरकार इस कार्ययोजना के तहत प्रदेश को झुग्गी मुक्त करना चाहती है। निश्चित ही सरकार की मंशा और योजना अच्छी है। लेकिन यह जमीन पर उतर आए और साकार हो जाएं इसको लेकर फिलहाल कुछ कह पाना जल्दबाजी होगा। चूंकि वर्तमान में प्रतिदिन प्रदेश के किसी न किसी कोने में 20 से 25 नई झुग्गियां आकार लेती नजर आ रही है तो वहीं स्थानीय नेता उन्हें प्रश्रेय देते और प्रशासन आंखें मूंदे नजर आता है।

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