केंद्रीय कृषि मंत्री ने कांग्रेस को जमकर घेरा

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-मोदी जी के नेतृत्व में भारत, दुनिया का फूड बॉस्केट बनेगा :  शिवराज  
अनोखा तीर, नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को राज्यसभा में कृषि और किसान संबंधी कामकाज पर वक्तव्य देते हुए कांग्रेस को जमकर घेरा। श्री चौहान ने कहा कि जो दिल में होता है वो जुबान पर आ ही जाता है। कांग्रेस के दिल में कभी किसान नहीं रहा इलसिए जुबान पर भी कभी नहीं आया। श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस का किसानों के विकास और कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। श्री चौहान ने कहा कि इनके एक नेता बड़ी-बड़ी यात्राएं करते हैं। यात्रा के दौरान जब हरियाणा के सोनीपत में खेत में पहुंचें तो रियल दिखने के लिए कई कैमरामेनों के साथ रील बनाई। किसानों से ज्यादा उनका फोकस कैमरामेनों पर था। कैमरामेनों से ही पूछ रहे थे कि, कहां खड़े होना है, क्या करना है..? राहुल गांधी रियल नहीं रील मैन हैं।
कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों की प्राथमिकता में कभी किसान नहीं रहे
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पंडित नेहरू जी ने अपने 17 वर्षों के प्रधानमंत्री कार्याकाल में 6 बार किसानों की बात की लेकिन कहीं भी किसानों के विकास, उनके लिए विजन एवं कृषि की प्रगति की बात नहीं की। मैंने देश के सभी प्रधानमंत्रियों के भाषण पढ़े, पर कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों की प्राथमिकता में कभी किसान नहीं रहा। स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषणों में पंडित नेहरू जी ने सन 1947 में एक बार भी किसान पर चर्चा नहीं की, 1948 में एक बार उल्लेख किया, 1949 से लेकर 1961 तक कोई विशेष चर्चा नहीं की। स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने भी 15 अगस्त के अपने भाषणों में 1966 में दो बार बात की, 1967 में एक बार चर्चा की, 1968 में तीन बार उल्लेख किया, 1969 में तीन बार चर्चा की, 1970 में एक बार और 1971, 72, 73 में भी केजुअली लिया गया। किसानों की कोई पॉलिसी की बात नहीं की। वहीं स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने भी कभी किसान कल्याण को प्राथमिकता नहीं दी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में 2014 में 6 बार, 2015 में 23 बार, 2016 में 31 बार, 2017 में 20 बार, 2018 में 17 बार, 2019 में 17 बार, 2020 में 17 बार, 2021 में 15 बार किसानों का नाम लिया है। किसान का नाम, खेती को प्राथमिकता पर बात की। नरेंद्र मोदी जी के दिल में किसान था, इसलिए जुबान पर किसान बार-बार आता है।
कांग्रेस की तत्कालीन राज्य सरकारों ने किसानों पर चलाई गोलियां  
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि, कांग्रेस किस मुंह से किसान की बात करती है। तत्कालीन कांग्रेस की राज्य सरकारों में किसानों पर गोलियां चलवाई गई है। जिसमें कई किसानों की जान गई। श्री चौहान ने कहा कि 1986 में जब कांग्रेस की सरकार बिहार में थी तब 23 किसानों की मौत गोलीबारी में हुई थी। 1988 में दिल्ली में श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर किसानों पर गोलियां चलाई गई, उसमें 2 किसान मारे गए। 1988 में मेरठ में किसानों पर फायरिंग की गई, जिसमें 5 किसानों की मौत हो गई। 23 अगस्त 1995 में हरियाणा में गोलियां चलाई गई जिसमें 6 किसान मारे गए। 12 जनवरी 1998 में मुलताई में किसानों पर गोली चलाई गई, जिसमें 24 किसान मारे गए। आंध्रप्रदेश में 2010 में 9 किसान मारे गए। कांग्रेस किसान विरोधी है ये केवल किसान हितैषी बनने का ढोंग करते हैं।
सम्मान निधि से किसान स्वावलंबी और सशक्त हुआ  
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम किसान सम्मान निधि पर चर्चा कर रहे थे, कांग्रेस ने किसानों को सीधी मदद की बात की, लेकिन कांग्रेस ने कभी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजना नहीं बनाई। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह योजना बनाई। लघु, छोटे, सीमांत किसानों के लिए 6000 रुपये की राशि मायने रखती है। इस किसान सम्मान निधि के कारण किसान आत्मनिर्भर बने हैं, किसान सशक्त भी हुए हैं और किसानों का सम्मान भी बढ़ा है, लेकिन कांग्रेस को किसानों का सम्मान नज़र नहीं आ रहा है।

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