आखिर क्यों नहीं मिला भाजपा को बहुमत?

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राकेश तिवारी कानपुर
आखिर भाजपा स्वंय के बूते बहुमत के आंकड़े से वह 32 सीट कम हासिल कर पायी। उसके बाद सोशल मीडिया इंडस्ट्रीज के माध्यम से जिस तरह हिन्दूओं को लेकर अनाप-शनाप बोला बका जा रहा है उससे मन दुखी हुआ।‌ चूंकि मैं भी हिन्दुस्तान देश का नागरिक हूं ,मेरा राष्ट्र हिन्दुस्तान होने से मैं हिन्दू हूं और धर्म मेरा सनातन है।
कल जब से भाजपा हारी है, कतिपय लोगों द्वारा इसके लिए दोषी हिन्दुओं को बताया जा रहा है। दलील दी जा रही है कि भाजपा के हारने से हिन्दुत्व को खतरा पैदा हो गया है।‌ भाजपा की हार का कारण हिन्दुओं को बताया जा रहा है। यह दरअसल हार के असली कारणो से बचने का एक सहज तरीका है।
जरा सोचिए ! भाजपा को यह जो 240 सीटें मिली है, यह किसके वोट से मिली ? जाहिर है, यह वोट सब हिन्दुओं के ही द्वारा दिए गए हैं। आज हिन्दुओं को देश द्रोही, राष्ट्र द्रोही, राम विरोधी, कालनेमि, दोगला और भी न जाने क्या क्या कहा जा रहा है।
अयोध्या में जो प्रत्याशी अवधेश प्रताप जीते हैं, क्या वो हिन्दू नहीं ?
एक सीधी सी बात है कि जिस पेड़ की शाख अपनी जड़ से दूर अपना अस्तित्व बनाने लगती है, वह सूख जाती है। गंगा जैसी पवित्र नदी भी जब अपने तटबन्ध तोड़ देती है, वह हिस्सा भी पूज्य नहीं रह जाता।
भाजपा ने भी यही किया, राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ भाजपा की पितृ संस्था है, उसके बड़े नेताओ की उपेक्षा की गई, जे. पी. नड्डा ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अब हमें संघ की जरूरत नहीं अडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी, शिवराज सिंह चौहान, श्रीमती सुमित्रा महाजन, श्रीमती वसुंधरा राजे, सुश्री उमा भारती, वी. के. सिंह (पूर्व सेनाध्यक्ष) जैसे न जाने कितने कुशल नेताओ /प्रशासको की उपेक्षा की गई.
मेरे विचार से अडवाणी जी राष्ट्रपति के पद के लिए सर्वाधिक योग्य व्यक्ति थे, उनकी जगह राम नाथ कोविन्द को लाया गया, आखिर ऐसा क्यों हुआ ?
उल्लेखनीय है कि श्री राम मंदिर की लडाई के नायक अडवाणी जी ही थे, मोदी जी उस वक्त उनके सिपहसालार मात्र थे.
भाजपा की तीन धरोहर
अटल अडवाणी मुरली मनोहर
यह एक लोकप्रिय नारा था.
नितिन गडकरी सरीखे ईमानदार, शिक्षित और कार्यकुशल नेता के कद को कम किया गया, आखिर क्यों ?
राजनाथ सिंह जैसे कुशल राजनीतिक समझ के नेता की अपेक्षा अमित शाह को महत्व दिया गया. कल तक जो नेता भ्रष्ट थे, आपके साथ आते ही ईमानदार हो गए. यह सब प्रबुद्ध वर्ग समझ रहा था. यह तो हुई राजनैतिक बात, अब आते हैं जनता के मुद्दों पर. पाँच किलो राशन की दम पर आप सोचने लगे कि बस किला फ़तह हो गया कारपोरेट सेक्टर अपनी मनमानी करता रहा, आपने अनदेखा किया, डाटा प्रोवाइडर कम्पनीज ने महीने को 28 दिन और वर्ष को 13 माह का कर दिया, बैंको ने मेसेज चार्ज, ट्रान्जेक्शन चार्ज, न्यूनतम धनराशि खाते में न होने पर चार्ज मनमाने तरीके से लगाए, आप मौन रहे. नाना प्रकार के टैक्स जनता पर मनमाने तरीके से लगाए गए. रूस यूक्रेन युद्ध का लाभ उठा कर आपने सस्ता कच्चा तेल खरीदा और उसे रिफ़ाइन करके विदेशों में बेच दिया, क्या उसमें जनता की हिस्सेदारी नहीं थी, यदि डीजल पेट्रोल के दाम नियंत्रित रहते तो जाहिर है माल ढुलाई की कीमत कम होती और महंगाई स्वत: नियंत्रित हो जाती. आपने हास्यास्पद बयान दिए नाले से गैस, पकौड़ा तलना, राडार के द्वारा सिग्नल रोक देना यह सब कम से कम विवेकी लोगों के गले नहीं उतरा. चुनाव के दौरान मंगलसूत्र, भैंस, टोन्टी, बिजली काट देने, मुजरा, टेम्पो में बोरे में नोट आदि आपके बयान हास्यास्पद लगे. यद्यपि इन सब कार्यो को भी व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के ट्रोल्स द्वारा जम कर डिफ़ेण्ड किया गया, जिसका प्रेरणा स्रोत आपका आई टी सेल है, लेकिन लोग सच समझ रहे थे. सनातन धर्म ध्वजवाहक हमारे शंकराचार्य भी अक्सर अपमानित किए जाने लगे, छद्म हिन्दुत्व की आड़ में सनातन संस्कृति की उपेक्षा और दलन जम कर किया गया. कुछ कथावाचक धर्म के नाम पर उत्तेजना और भ्रम फ़ैलाने लगे. एट्रोसिटी एक्ट आपने मनमाने तरीके से और घातक बना कर लागू कर दिया. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय कार्य आपने नहीं किया. बेरोजगारी दिन पर दिन बढती गयी, आपने कोई प्लान प्रस्तुत नहीं किया. कांग्रेस का मैनिफ़ैस्टो जिसे कोई देखना भी नहीं चाहता था, आपके एक बयान से कम से कम दो करोड़ लोगों ने उसे नेट पर खोज कर डाउनलोड किया और पढा. यह भी आपकी प्रेरणा से हुआ. क्षत्रिय वर्ण जो हिन्दुस्तान का मुकुट है, अनगिनत युद्ध लड़ने के कारण जिनकी जनसंख्या ही कम हो गयी, आल्ह खण्ड में जागन ने लिखा है कि, बारह बरस तक कूकुर जीवै, औ सोरह तक जियै सियार. बरस अठारह क्षत्री जीवै आगे जीबे को धिक्कार. ऐसे पराक्रमी, शूर वीर वर्ण को आपके एक सांसद प्रत्याशी पुरुषोत्तम रूपाला सार्वजनिक तौर पर अपमानित कर रहे थे, लेकिन आपसे उनका टिकट न काटा गया. बनारस, अयोध्या जैसी नगरी में उत्तर प्रदेश की अपेक्षा कारोबार, कान्ट्रेक्ट आदि में गुजरात के व्यापारियों को बढावा दिया गया. यह सब यहाँ के मूल बाशिन्दे मौन होकर देख रहे थे, समय आने पर इन्होंने आपका बहिष्कार कर दिया. दोषी कौन ? मोदी जी सच तो यह है कि आप आत्ममुग्धता के शिकार हो गए. सर्वत्र मोदी ही मोदी. जबकि भाजपा के विस्तार में सभी का योगदान रहा. योगी जी की कार्यशैली भी प्रशंसा योग्य है.
कुल मिलाकर जो परिणाम आए, इसमें हिन्दू कदापि दोषी नहीं. यह सब निवर्तमान सरकार की निरंकुशता का प्रतिफ़ल है. भारत की जनता निरंकुश सत्ता को बर्दाश्त नहीं करती, फ़िर चाहें वह स्वर्गीया इंदिरा गांधी हों, संजय गांधी हों या नरेंद्र मोदी.
वेद पुरान निगम अस भाखा
जो जस किया सो तस फ़ल चाखा
बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय
आशा है, अगर इस बार फ़िर भाजपा सरकार बन सकती है तो स्वस्थ समीक्षा करते हुए जन सेवा में लगिए. कांग्रेस का भविष्य उज्ज्वल नहीं दिखता, वर्तमान कांग्रेस अब अपनी मूल विचारधारा से भटक कर आहिस्ता आहिस्ता कम्युनिज्म की तरफ़ सरक रही है और यह देश कम्युनिज्म को कदापि स्वीकार नहीं करेगा।‌

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